बंगाल की राजनीति अब मंदिर की घंटियों और वोट की गिनती के बीच झूल रही है। जहां एक तरफ ‘धर्म’ को डर बताया गया, वहीं अब वही धर्म चुनाव का सबसे बड़ा हथियार बन चुका है। और सवाल ये है कि क्या ये सिर्फ पूजा है… या सत्ता की सबसे खामोश रणनीति? क्योंकि यहां मुद्दा सिर्फ मंदिर नहीं, आपकी थाली और आपकी पहचान का है।तीसरी लाइन आपको रोकेगी: क्योंकि इस कहानी में वोटर नहीं, पूरा समाज दांव पर है। ‘स्लॉग ओवर’ में सियासी सर्जिकल स्ट्राइक ये सिर्फ चुनाव का आखिरी चरण…
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