असम के लंका रेलवे स्टेशन पर नागालैंड एक्सप्रेस में ड्यूटी पर तैनात टीटीई भजन मालाकार, यात्रियों से नकदी लेकर टिकट के बदले सादा कागज़ पर नाम-पता नोट करते हुए पकड़े गए हैं — और वो भी वीडियो कैमरे में! अब तक ये जादूगरियाँ सिर्फ़ जादू के शो में देखी थीं, लेकिन मालाकार जी ने दिखा दिया कि भारतीय रेलवे में ‘टिकट का विकल्प’ भी उपलब्ध है — बस कैमरा ऑन मत होना चाहिए। ‘कैश पेपर एक्सप्रेस’ का वायरल वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में देखा गया कि TTE…
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111 साल बाद भी “चारबाग स्टेशन से ट्रेनें भी फुसफुसा के निकलती हैं!”
लखनऊ का चारबाग स्टेशन सिर्फ ट्रेन पकड़ने की जगह नहीं, यह एक जीती-जागती म्यूज़ियम है।1914 में बिशप जॉर्ज हर्बर्ट ने इसकी नींव रखी और जब 1923 में बनकर तैयार हुआ, तो अंग्रेजों ने कहा—”अब भारतीयों को छांव तो मिल गई, लेकिन सीट नहीं!”9 साल लगे इसे बनाने में, और 70 लाख रुपये खर्च हुए (जो उस वक्त का “रेल बजट” ही था!)। बिना आवाज़ वाली ट्रेनें—जादू नहीं, आर्किटेक्चर है! चारबाग स्टेशन की सबसे दिलचस्प बात ये है कि ट्रेन की आवाज़ बाहर नहीं आती। क्यों? क्योंकि इसका आर्किटेक्ट ऐसा था…
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