लखनऊ… जहां तहज़ीब सांस लेती है। लेकिन 100 साल बाद… यही शहर टेक्नोलॉजी की धड़कन भी बनेगा। और तब सवाल ये नहीं होगा कि “लखनऊ कैसा है”… सवाल होगा “लखनऊ कितना आगे निकल चुका है?” ये कहानी भविष्य की नहीं…ये उस सपने की है जो आज बन रहा है। और 2126 में हकीकत बन जाएगा। AI ने दिखाई भविष्य की झलक। इमामबाड़ा 2.0: इतिहास और भविष्य का संगम Bara Imambara और Rumi Darwaza अब सिर्फ ऐतिहासिक स्मारक नहीं होंगे…ये “फ्यूचर आर्किटेक्चर” के आइकन बन चुके होंगे। गोमती नदी अब गंदगी नहीं…बल्कि…
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गोमती की लहरों पर चलती शायरी—वही पुराना लखनऊ, नए अंदाज़ में
Lucknow की मशहूर नज़ाकत और नफ़ासत को एक नए अंदाज़ में ज़िंदा रखने के लिए रविवार को ‘द गोमती बोट ट्रेल’ का आयोजन किया गया।Rang-E-Awadh की ओर से हुए इस अनोखे इवेंट ने Gomti River के किनारे एक खूबसूरत महफ़िल सजा दी—बिलकुल पुराने नवाबी दौर की यादों जैसी। रिवरफ्रंट से लेकर शाहिद स्मारक किनारे तक लोग बड़ी संख्या में जुटे, जहां सजी-धजी नाव में बैठे शायर, मेहमान और कलाकारों ने माहौल को रस भर दिया। चलती नाव पर शायरी—Lucknow का Royal Touch नवाब मसूद अब्दुल्लाह, मेराज हैदर, शायर मोहम्मद साहिल,…
Read Moreमंत्री संजय निषाद ने डालीं मछलियां… आधी तो उतराते ही स्वर्ग सिधार गईं
लखनऊ के लक्ष्मण झूला पार्क के पास गोमती रिवरफ्रंट पर सोमवार को एक बड़ा कार्यक्रम हुआ। मौका था—प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 2 लाख मछलियां गोमती में छोड़ने का। मंत्री संजय निषाद खुद मौजूद थे, बड़े-बड़े अधिकारी साथ में… और कैमरे तो थे ही। लेकिन जैसे ही मछलियां पानी में गईं— “मोटिलिटी” की जगह मॉर्टैलिटी देखने को मिल गई! असंख्य मछलियां उतराते ही मरने लगीं। “Fish Release turned Fish Relief (to Yamraj)” मंत्री की सफाई—‘अब मोटिलिटी 10% रह गई, पहले 30% थी’ मंत्री संजय निषाद ने कहा— “नदियों में मछलियों…
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