दो साल… सिर्फ कैलेंडर के पन्ने नहीं थे, बल्कि हर दिन एक डर, हर रात एक दहशत। और फिर उसी गाज़ा की जमीन पर, जहां कभी सिर्फ धमाकों की आवाज गूंजती थी, आज “अल्लाहु अकबर” की पुकार सुनाई दी। यह सिर्फ नमाज़ नहीं थी… यह जिद थी—जिंदगी की, उम्मीद की, और उस यकीन की कि बर्बादी के बाद भी इंसान खड़ा होता है। दो साल बाद लौटी ईद की रौनक Eid al-Fitr के मौके पर Gaza City के Saraya Square में नमाज़ अदा की गई—पूरे दो साल बाद। यह वही जगह…
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