उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने रिश्तों, सिस्टम और समय—तीनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। खतौली कस्बे के मोहल्ला बालकराम निवासी चाचा शरीफ, जिन्हें परिवार 28 साल से मृत मान चुका था, अचानक अपने घर के दरवाज़े पर खड़े मिले। कोई चमत्कार नहीं, कोई फिल्मी ट्विस्ट नहीं—बल्कि इस कहानी की चाबी है Special Intensive Revision (SIR)। पत्नी की मौत, यादों से भागकर बंगाल का सफर साल 1997 में पहली पत्नी के निधन के बाद शरीफ साहब दूसरी शादी कर पश्चिम बंगाल चले…
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