दिल्ली-NCR में हैलोवीन का खौफनाक जश्न, कहीं खूनी ड्रिंक्स तो कहीं कब्रिस्तान जैसे डेजर्ट; जानें कहां क्या है खास

नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में इस सप्ताहांत हैलोवीन का रंग चढ़ा हुआ है। शहर के रेस्तरां, होटल और पार्टी स्थलों पर डरावनी थीम के साथ खास तैयारियां की गई हैं। कहीं मेहमानों को खूनी लाल रंग के पेय परोसे जाएंगे तो कहीं कब्रिस्तान जैसे दिखने वाले डेजर्ट और भूतिया बिरयानी का स्वाद मिलेगा। कुछ जगहों पर वैम्पायर के साथ डिनर का अनुभव होगा, तो कहीं जांबी और चुड़ैलों के बीच संगीत की धुन पर थिरकने का मौका मिलेगा। 31 अक्टूबर को मनाए जाने वाले इस त्योहार के लिए दिल्ली और एनसीआर में बच्चों से लेकर युवाओं और परिवारों तक के लिए कई आयोजन रखे गए हैं।

डरावने मुखौटों और कद्दू की सजावट के बीच जश्न

हैलोवीन को लेकर आयोजकों ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। युवा वर्ग के लिए डरावनी थीम वाली पार्टियों, लाइव संगीत और खास पेय का इंतजाम है। वहीं बच्चों और परिवारों के लिए राक्षसों की परेड, ट्रिक-ओर-ट्रीट, डरावनी कलाकृतियों और मनोरंजक खेलों जैसी गतिविधियां आयोजित होंगी।

इस बार हैलोवीन का आकर्षण केवल डरावने मुखौटों और कद्दू की सजावट तक सीमित नहीं है। खाने-पीने, संगीत, वेशभूषा प्रतियोगिता और रोमांचक गतिविधियों के जरिए इसे खास बनाने की कोशिश की गई है।

ओखला में खुलेगी डर की दुनिया

हॉरर के शौकीनों के लिए ओखला स्थित एनएसआईसी ग्राउंड में 31 अक्टूबर और एक नवंबर को आयोजित होने वाला ‘हाररकान इंडिया 2026’ खास आकर्षण रहेगा। यहां भुतहा घर में डरावने माहौल का अनुभव लेने के साथ लोग डरावनी कहानियां सुनने, वेशभूषा प्रतियोगिता, खेल गतिविधियों और हॉरर फिल्म महोत्सव का हिस्सा बन सकेंगे।

आयोजन में हैलोवीन परेड और फोटो बूथ भी होंगे, जहां लोग अपने डरावने रूप को कैमरे में कैद कर सकेंगे। इसके अलावा लाइव संगीत की भी व्यवस्था रहेगी। बच्चों के लिए ‘हेलोविल’ वेशभूषा प्रतियोगिता, राक्षसों की परेड और ट्रिक-ओर-ट्रीट जैसी गतिविधियां रखी गई हैं। बच्चे अपने पसंदीदा भूत, वैम्पायर या काल्पनिक किरदारों की पोशाक पहनकर उत्सव का आनंद ले सकेंगे। इस तरह एक ही स्थान पर बच्चों के लिए मनोरंजन और बड़ों के लिए डर का रोमांच मिलेगा।

खूनी मॉकटेल से भूतिया बिरयानी तक का स्वाद

अगर आप हैलोवीन पर खाने की मेज पर भी डरावना अनुभव लेना चाहते हैं तो कनॉट प्लेस स्थित नोवोटेल नई दिल्ली सिटी सेंटर में खास इंतजाम किया गया है। यहां 31 अक्टूबर को ‘ए स्पूकटेकुलर फीस्ट’ के तहत विशेष रात्रिभोज और बुफे आयोजित होगा। मेहमानों को खूनी तंदूरी विंग्स, भूतिया मटन बिरयानी और कब्रिस्तान जैसे दिखने वाले कपकेक परोसे जाएंगे। फूड एक्सचेंज में डरावनी सजावट और रंगीन रोशनी के बीच खाने का आनंद लिया जा सकेगा।

खास व्यंजनों को दिया गया हैलोवीन का अंदाज

विशेष मेन्यू में गोस्टली मटन बिरयानी, ब्लडी तंदूरी विंग्स, स्पूकी आइबाल कैप्रेसे, जैक-ओ-लैंटर्न स्टफ्ड पेपर्स, विचेज ब्रूड टोमैटो सूप, मॉन्स्टर केक और ग्रेवयार्ड कपकेक शामिल किए गए हैं।

होटल के जनरल मैनेजर सौमित्र चतुर्वेदी के मुताबिक, आयोजन का उद्देश्य रचनात्मक सजावट, खास व्यंजनों और बच्चों की गतिविधियों के जरिए परिवारों और दोस्तों को साथ में यादगार समय बिताने का अवसर देना है। वहीं, कार्यकारी शेफ उमेश ने बताया कि लोकप्रिय व्यंजनों को हैलोवीन की थीम के अनुरूप नया रूप दिया गया है, ताकि मेहमानों को स्वाद के साथ रोमांच का अनुभव भी मिल सके।

गुरुग्राम में भूत-चुड़ैलों के बीच होगा साल्सा और बचाता

गुरुग्राम के एम3एम ब्रॉडवे स्थित पोप्स साउथवेस्ट कैंटीना में रात को ‘सिप एंड साल्सा-हैलोवीन स्पेशल’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यहां संगीतकार रवि की धुनों पर साल्सा, बचाता और किजोंबा का आनंद लिया जा सकेगा। इसके साथ ही सर्वश्रेष्ठ हैलोवीन वेशभूषा वाले जोड़े की प्रतियोगिता भी होगी। विजेता जोड़ी को पुरस्कार दिया जाएगा।

रवि रस्तोगी का कहना है कि हैलोवीन केवल डरावनी पोशाक और रहस्यमयी माहौल का त्योहार नहीं है, बल्कि यह खुद को अलग अंदाज में व्यक्त करने, संगीत का आनंद लेने और नए लोगों से जुड़ने का अवसर भी है।

कैफे और होटलों में भी खास आयोजन

हौज खास स्थित शेलबीकन कैफे में सप्ताहांत पर हैलोवीन कार्निवल आयोजित किया जा रहा है। यहां गॉथ नाइट, हैलोवीन नाइट और 1920 के दशक के बर्लिन से प्रेरित कार्यक्रम होंगे। आयोजन की थीम के मुताबिक तैयार होकर आने वाले लोग डरावने संगीत, भूतिया सजावट और खास माहौल के बीच तस्वीरें खिंचवा सकेंगे।

एयरोसिटी स्थित प्राइड प्लाजा होटल में सप्ताहांत पर ‘हॉन्टेड आवर्स’ का आयोजन होगा। वहीं गुरुग्राम के बेलाविनो में कासा बैकार्डी की हैलोवीन पार्टी रखी गई है। वसंत विहार के रूमर में भी खास कॉकटेल और हैलोवीन मेन्यू के जरिए इस मौके को अलग अंदाज में मनाने की तैयारी है।

मॉल और पार्टी स्थलों पर भूतों का जहाज

दिल्ली-एनसीआर के चर्चित पार्टी स्थलों में लॉर्ड ऑफ द ड्रिंक्स, द फ्लाइंग डचमैन, रूफ 95, मिनिस्ट्री ऑफ साउंड और इंपीरियल स्पाइस ने भी हैलोवीन के लिए विशेष सजावट की है। द फ्लाइंग डचमैन में ‘पाइरेट्स ऑफ द कैरेबियन’ और जांबी थीम पर भूतिया जहाज का नजारा तैयार किया गया है।

यहां भुतहा घर, जांबी सर्वनाश और खून जैसे लाल रंग वाली वैम्पायर नाइट की थीम पर सजावट की गई है। बार में सूखी बर्फ से भरे बर्तनों से निकलता धुआं और लाल रंग के पेय माहौल को डरावना बनाएंगे। मेन्यू में वैम्पायर ब्लड पंच, विचेज ब्रू कॉकटेल, कंकाल कबाब और जांबी फिंगर फ्राइज जैसे खास व्यंजन शामिल हैं।

दिल्ली में 1970 के दशक से दिखने लगा था हैलोवीन का चलन

हैलोवीन मनाने की परंपरा भले ही अब आम लोगों के बीच लोकप्रिय हो रही हो, लेकिन दिल्ली के पॉश और राजनयिक इलाकों में इसका चलन काफी पहले शुरू हो गया था। इतिहासकार आरवी स्मिथ की पुस्तक ‘दिल्ली-अननोन टेल्स ऑफ ए सिटी’ में 1970 के दशक की शुरुआत में हुए एक ऐसे ही आयोजन का जिक्र मिलता है। उस समय विदेशी राजनयिकों की मौजूदगी वाले इलाकों में इस तरह की पार्टियां आयोजित की जाती थीं।

डरावनी कहानियों से सजती थी महफिल

आरवी स्मिथ ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि उन्हें भी 1970 के दशक की शुरुआत में ऐसे ही एक आयोजन को देखने का अवसर मिला था। उस शाम नई दिल्ली में लंदन के अखबार ‘द टाइम्स’ के प्रतिनिधि पीटर हेजल हर्स्ट कुछ समय के लिए वहां पहुंचे थे। एसोसिएटेड प्रेस के एक पत्रकार ने इस मौके पर जादूगर की पोशाक पहन रखी थी।

पार्टी के माहौल को और रहस्यमयी बनाने के लिए वहां मौजूद लोगों ने भूत-प्रेतों की डरावनी कहानियां सुनानी शुरू कर दीं। इसी दौरान एक ऐसी कहानी सुनाई गई, जिसने पूरी महफिल का माहौल बदल दिया। बताया गया कि यह कहानी उन्हें नेविल मैक्सवेल से सुनने को मिली थी, जो ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर थे।

मेटकाफ हाउस में भी होती थी हैलोवीन पार्टी

कहानी के मुताबिक, जब सर थॉमस मेटकाफ 1836 से 1853 के बीच दिल्ली में ब्रिटिश रेजिडेंट थे, तब वह अपनी मेटकाफ हाउस स्थित हवेली में हैलोवीन की पार्टी आयोजित किया करते थे। यह वही दौर था, जिसके कुछ महीनों बाद रानी जीनत महल द्वारा उन्हें जहर दिए जाने की घटना का जिक्र मिलता है।

बताया जाता है कि सर थॉमस की मृत्यु से कुछ महीने पहले हवेली में एक हैलोवीन पार्टी आयोजित की गई थी। उस शाम मेहमानों के बीच भूत-प्रेतों की कहानियां सुनाने का प्रस्ताव रखा गया। रात गहराने पर सर थॉमस ने सुझाव दिया कि सभी लोग एक-दूसरे को डरावनी कहानियां सुनाएं।

वहां मौजूद एक उदास मिजाज के डॉक्टर को सबसे पहले कहानी सुनाने के लिए कहा गया। शुरुआत में उन्होंने इसमें कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई, लेकिन आखिरकार छोटे कद और भारी शरीर वाले डॉक्टर हैमिल्टन ने गला साफ किया और अपनी कहानी शुरू की।

महरौली के ठाकुर की जांच के लिए पहुंचे थे डॉक्टर

डॉक्टर हैमिल्टन ने बताया कि उन दिनों वह दिल्ली में एक सिविल सर्जन के अधीन काम करते थे। एक दिन उनके वरिष्ठ अधिकारी ने उन्हें बुलाकर महरौली जाने का आदेश दिया। वहां एक ठाकुर की जांच करनी थी, जिसके बारे में बताया गया था कि उसका मामला सामान्य नहीं है।

डॉक्टर ने पहले वहां जाने से इनकार किया, लेकिन जब उन्हें लगा कि उनके वरिष्ठ अधिकारी नाराज हो रहे हैं तो उन्होंने घोड़ा तैयार करवाया और महरौली के लिए रवाना हो गए।

हवेली पहुंचते ही सामने आई रहस्यमयी कहानी

हवेली पहुंचने पर पगड़ी पहने एक व्यक्ति ने डॉक्टर का स्वागत किया। उसने ठाकुर बेनी सिंह के बारे में कुछ ऐसी बातें बताईं, जिनसे पूरा मामला और रहस्यमयी लगने लगा। उसके मुताबिक, ठाकुर की जिंदगी में पिछले कुछ वर्षों के दौरान दो बड़े बदलाव आए थे।

पहला बदलाव तब आया था, जब तपेदिक के कारण उनकी पत्नी और बेटी की मृत्यु हो गई। इस सदमे के बाद ठाकुर ने अपनी जिंदगी की दिशा बदल ली और अय्याशी में समय बिताने लगे।

पुराने शतरंज के सेट ने बदल दी ठाकुर की जिंदगी

ठाकुर की जिंदगी में दूसरा और ज्यादा रहस्यमयी बदलाव तब आया, जब उन्होंने एक नीलामी में शतरंज का पुराना सेट खरीदा। इस सेट के घर आने के बाद उनकी दिनचर्या पूरी तरह बदल गई। उन्होंने बाहर निकलना लगभग बंद कर दिया और शाम होते ही अकेले बैठकर शतरंज खेलने लगे।

डॉक्टर हैमिल्टन ने जब ठाकुर से मुलाकात की तो उन्होंने भी इन बातों की पुष्टि की। अपनी परेशानी के बारे में पूछे जाने पर ठाकुर ने किसी शारीरिक बीमारी से इनकार किया। उन्होंने बताया कि उन्हें एक बेचैनी सताती रहती है और वह चांदनी रातों में अपनी ‘बेगम’ से मिलने का इंतजार करते हैं।

शतरंज की रानी को ही अपनी बेगम मानने लगे थे ठाकुर

ठाकुर की बेगम कोई महिला नहीं, बल्कि उनके पुराने शतरंज के सेट की रानी थी। वह उस सेट की सबसे कीमती मोहर थी। ठाकुर का दावा था कि चांदनी रातों में शतरंज की यह रानी जीवित हो जाती है, उनके पास आती है और उनके साथ समय बिताती है।

उनकी बातें केवल शतरंज खेलने तक सीमित नहीं थीं, बल्कि वह उस रानी के साथ अपने संबंधों को लेकर भी अजीबोगरीब दावे कर रहे थे। डॉक्टर हैमिल्टन को उनकी बातें मानसिक भ्रम जैसी लगीं। उन्हें यह आशंका भी हुई कि कहीं ठाकुर तपेदिक से तो पीड़ित नहीं हैं।

ठाकुर ने की थी अपनी मौत की भविष्यवाणी

डॉक्टर ने ठाकुर को कुछ दवाइयां दीं और उस रहस्यमयी हवेली से जल्द निकल जाना ही बेहतर समझा। हालांकि, जाने से पहले ठाकुर ने उनसे एक ऐसी बात कही, जिसे वह चाहकर भी भुला नहीं पाए। ठाकुर का कहना था कि शतरंज की रानी अगले चांदनी वाले पखवाड़े में आखिरी बार उनसे मिलने आएगी और फिर उन्हें अपने साथ ले जाएगी।

ठीक 15 दिन बाद सिविल सर्जन को दरबार से एक संदेश मिला। इसमें बताया गया कि ठाकुर बेनी सिंह की रात में रहस्यमयी परिस्थितियों में मृत्यु हो गई है।

मौत की खबर मिलते ही महरौली पहुंचे अधिकारी

ठाकुर की मृत्यु की खबर मिलते ही सिविल सर्जन, डॉक्टर हैमिल्टन और मजिस्ट्रेट अपने-अपने घोड़ों पर सवार होकर महरौली स्थित उस हवेली की ओर रवाना हो गए। वहां पहुंचने पर उन्होंने जो दृश्य देखा, वह इतना विचित्र और विचलित करने वाला था कि सभी लोग सन्न रह गए।

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