
राजधानी में आयोजित शहीद वीरांगना ऊदा देवी के शहादत दिवस कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का भाषण उतना ही दमदार था जितनी दमदार खुद ऊदा देवी थीं। उन्होंने वामपंथी इतिहासकारों पर तंज कसते हुए कहा कि इतिहास को उनकी सुविधा के अनुसार लिखा गया — जैसे किसी कॉलेज प्रोजेक्ट में “कॉपी-पेस्ट” करते समय अपनी पसंद से पैराग्राफ हटा दिया जाए!
राजनाथ सिंह का आरोप साफ़ था: दलित, आदिवासी और पिछड़े समुदायों के वीर नायकों को इतिहास में वह सम्मान नहीं मिला, जिसके वे हकदार थे।
“इतिहास लिखा ऐसे… जैसे देश का संघर्ष सिर्फ एक क्लब ने लड़ा हो!”
राजनाथ सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम का ऐसा चित्रण पेश किया गया मानो आज़ादी सिर्फ एक पार्टी और कुछ चुनिंदा लोगों ने दिलाई।
बाकी सारे तो जैसे “guest appearance” में थे!
उन्होंने कहा कि पासी साम्राज्य और उसके इतिहास पर किसी इतिहासकार ने ठीक से रिसर्च तक नहीं की।
इतने वीर, इतना संघर्ष… और एक भी Textbook में chapter नहीं!
ऊदा देवी: British Army को धूल चटाने वाली ‘Lady Commando’
राजनाथ सिंह ने ऊदा देवी की वीरता को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अंग्रेजों की पूरी बटालियन को चुनौती दी, और शहादत के बाद भी ब्रिटिश अफ़सर उनके साहस के आगे नतमस्तक हो गए।
उनका कहना था कि ऊदा देवी ने साबित किया कि देशभक्ति को जाति-धर्म का चश्मा पहनाने की ज़रूरत नहीं।
ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा: “1857 की क्रांति में ऊदा देवी वो थीं, जिनके सामने आज के एक्शन फिल्मों की हीरोइन्स भी फीकी लगें।”

दलित-पिछड़े नायकों के योगदान को नकारा गया—राजनाथ का तर्क
उन्होंने मदारी पासी के ‘एका आंदोलन’ को याद करते हुए कहा कि किसानों के हितों की लड़ाई लड़ने वाले इन नेताओं को इतिहास की किताबों में एक पेज भी नसीब नहीं हुआ। इतिहास के पन्ने पलटने पर इनके नाम दिखाई देते हैं, बस माइक्रोस्कोप लेकर देखो!
“हर बेटी ऊदा देवी बन सकती है”—नारी शक्ति पर जोर
रक्षा मंत्री ने कहा कि आज भी भारत की बेटियां उसी साहस के साथ देश की रक्षा कर रही हैं। ऑपरेशन सिंदूर में महिला पायलटों और सैनिकों की भूमिका इसका ताज़ा उदाहरण है। भूमि से लेकर आसमान तक, आज की नारी ‘ड्यूटी मोड’ में किसी से पीछे नहीं।
ऊदा देवी: सिर्फ योद्धा नहीं, दलित महिला नेतृत्व की मिसाल
राजनाथ ने कहा कि ऊदा देवी को सिर्फ उनकी वीरता के लिए नहीं, बल्कि एक नेता के रूप में याद किया जाएगा जिन्होंने दलित समाज की महिलाओं को ब्रिटिश शासन के खिलाफ संगठित किया।
उनका जीवन बताता है कि साहस वही है जो अन्याय, भेदभाव और दासता—तीनों के खिलाफ खड़ा हो सके।
आज की महिलाएं—सियाचिन से समंदर तक ‘शौर्य चक्र’ का नया आयाम
उन्होंने बताया कि सैनिक स्कूलों से लेकर फाइटर कॉकपिट तक—महिलाएं अब हर जगह अग्रिम पंक्ति में हैं।
सियाचिन की बर्फीली चोटियों से लेकर Navy की सबमरीन ट्रेनिंग तक—नारी शक्ति अब भारत की सुरक्षा चक्र को और मजबूत कर रही है।
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