मोहम्मद शमी की जयंत चौधरी से मुलाकात के बाद सियासी हलचल तेज, क्या अमरोहा से शुरू होगी क्रिकेटर की राजनीतिक पारी?

अमरोहा: भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी की राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष जयंत चौधरी से मुलाकात के बाद उत्तर प्रदेश के अमरोहा में राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। जयंत चौधरी ने रविवार को शमी के साथ मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की, जिसके बाद शमी के राजनीति में आने को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि, शमी या रालोद की ओर से चुनाव लड़ने अथवा पार्टी में शामिल होने को लेकर अभी तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से बाहर हैं शमी

मोहम्मद शमी ने भारत के लिए अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला 9 मार्च 2025 को न्यूजीलैंड के खिलाफ चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में खेला था। इस मुकाबले में उन्होंने नौ विकेट लिए थे और उन्हें आईसीसी की ‘टीम ऑफ द टूर्नामेंट’ में भी चुना गया था।

इसके बाद से शमी भारतीय टीम से बाहर हैं। मई 2026 में मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर ने कहा था कि अफगानिस्तान सीरीज के लिए शमी के नाम पर चर्चा नहीं हुई थी, क्योंकि टीम को बताया गया था कि वह फिलहाल टी-20 के लिए उपलब्ध हैं। वहीं, 2025-26 के घरेलू सत्र में बंगाल की ओर से रणजी, विजय हजारे और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में कुल 67 विकेट लेने के बावजूद सितंबर में वेस्टइंडीज के खिलाफ घोषित वनडे टीम में उन्हें जगह नहीं मिली।

राजनीति में आने के सवाल पर पहले भी दिया था जवाब

मोहम्मद शमी के राजनीति में आने को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। वर्ष 2023 में उन्होंने उत्तर प्रदेश की रणजी टीम में चयन से जुड़े अपने अनुभव का जिक्र किया था। उन्होंने बताया था कि चयन के लिए दो बार ट्रायल के अंतिम दौर तक पहुंचने के बावजूद उनसे कुर्सी हिलाने की बात कही गई थी। इसके बाद उनके भाई हसीब ने फॉर्म फाड़ दिया था और शमी ने बंगाल का रुख किया था।

अप्रैल 2026 में राजनीति में आने के सवाल पर शमी ने इसे पूरी तरह खारिज नहीं किया था। उन्होंने कहा था कि फिलहाल उनका ध्यान क्रिकेट पर है और जब मन बनेगा तो वह बता देंगे। अब जयंत चौधरी से मुलाकात के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चा फिर शुरू हो गई है।

शमी के बड़े भाई हसीब को लेकर भी चर्चाएं

जयंत चौधरी और मोहम्मद शमी की मुलाकात के बाद उनके बड़े भाई हसीब को लेकर भी अमरोहा में राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि अगर क्रिकेट की व्यस्तताओं के कारण शमी खुद चुनाव मैदान में नहीं उतरते हैं तो परिवार के किसी सदस्य को आगे किया जा सकता है।

हसीब के अमरोहा सीट से चुनाव लड़ने को लेकर पहले भी चर्चाएं सामने आती रही हैं। हालांकि, हसीब या रालोद की ओर से उनकी उम्मीदवारी को लेकर भी अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

हसीब ने कहा कि वह फिलहाल कानपुर में हैं और उन्हें रविवार को शमी और जयंत चौधरी की मुलाकात की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि वह कार चला रहे हैं और कुछ देर बाद शमी से इस बारे में बात करेंगे। चुनाव लड़ने या नहीं लड़ने को लेकर उन्होंने फिलहाल कोई टिप्पणी करने से इनकार किया।

अमरोहा सीट के समीकरण से भी जुड़ी चर्चा

मोहम्मद शमी का परिवार अमरोहा से जुड़ा है। अमरोहा विधानसभा सीट को मुस्लिम बहुल माना जाता है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक यहां करीब सवा तीन लाख मतदाता हैं, जिनमें लगभग दो लाख मुस्लिम मतदाता हैं। इनमें करीब 70 हजार मतदाता तुर्क बिरादरी से बताए जाते हैं, जिससे शमी का परिवार आता है।

इस सीट पर पिछले पांच चुनावों से सपा विधायक और पूर्व मंत्री महबूब अली का कब्जा बताया गया है। रालोद गठबंधन के तहत अमरोहा और नौगावां सादात दोनों सीटों पर दावेदारी जता रही है। ऐसे में जयंत चौधरी और शमी की मुलाकात के बाद अमरोहा सीट को लेकर राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

फिलहाल आधिकारिक ऐलान का इंतजार

मोहम्मद शमी और जयंत चौधरी की मुलाकात सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में कई तरह की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है। कुछ रिपोर्टों में शमी के अमरोहा से चुनाव लड़ने की संभावना का जिक्र किया गया है, जबकि अन्य रिपोर्टों में इन चर्चाओं को अभी कयास बताया गया है। शमी या रालोद की ओर से फिलहाल चुनाव लड़ने या पार्टी में शामिल होने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

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