
उत्तर प्रदेश की सियासत में एक और बड़ा मोड़ आता दिख रहा है। कांग्रेस से नाराज़ चल रहे वरिष्ठ नेता Naseemuddin Siddiqui अब ‘हाथ’ का साथ छोड़कर ‘साइकिल’ की सवारी करने की तैयारी में हैं।
सूत्रों के मुताबिक आज शाम उनकी मुलाकात Akhilesh Yadav से होगी, और 15 फरवरी को औपचारिक रूप से Naseemuddin Siddiqui समाजवादी पार्टी जॉइन कर सकते हैं।
BSP से Congress, अब SP… सियासी सफर का नया मोड़
कभी Bahujan Samaj Party के कद्दावर मुस्लिम चेहरे रहे नसीमुद्दीन, फिर कांग्रेस में गए। अब संकेत साफ हैं वो साइकिल की रफ्तार बढ़ाने वाले हैं। यह सिर्फ पार्टी बदलना नहीं, बल्कि समीकरण बदलने की कोशिश है।
SP की PDA मुहिम को कितना फायदा?
Samajwadi Party की PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति को इससे सीधा बूस्ट मिल सकता है।
संभावित फायदे:
मुस्लिम वोट बैंक में संदेश: “SP ही मजबूत विकल्प”, BSP के परंपरागत वोट में सेंध, कांग्रेस के कमजोर होते कैडर पर दबाव, पश्चिम और बुंदेलखंड क्षेत्र में नई ऊर्जा।
नसीमुद्दीन का संगठनात्मक अनुभव SP के लिए चुनावी मशीनरी को धार दे सकता है।

2027 विधानसभा चुनाव में क्या असर?
अगले वर्ष होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में यह कदम रणनीतिक साबित हो सकता है। PDA समीकरण मजबूत। मुस्लिम + यादव + कुछ दलित वोटों का समेकन। कांग्रेस का संभावित नुकसान। BSP की और गिरती पकड़।
अगर SP इस नैरेटिव को “वापसी की लहर” में बदलने में सफल रही, तो विपक्षी राजनीति का चेहरा बदल सकता है।
राजनीति में रिश्ते भी मौसम जैसे होते हैं…कभी हाथ थामते हैं, कभी साइकिल पकड़ लेते हैं! वोटर सोच रहा है – “नेता जी, सीट पक्की हो तो गाड़ी कोई भी चले!”
यह सिर्फ एक जॉइनिंग नहीं है। यह 2027 की पिच पर पहली प्रैक्टिस बॉल है। SP अगर इसे सही तरीके से भुना लेती है, तो PDA का नारा सिर्फ नारा नहीं, ग्राउंड फॉर्मूला बन सकता है।
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