“अब न्याय नहीं सोएगा! आधी रात को भी खुलेगा कोर्ट – गेमचेंजर ऐलान”

Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

भारत की न्यायिक व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव की आहट है। Chief Justice of India (CJI) सूर्यकांत ने संकेत दिए हैं कि अब कानूनी इमरजेंसी की स्थिति में नागरिक आधी रात को भी अदालत का दरवाज़ा खटखटा सकेंगे।

एक इंटरव्यू में CJI ने साफ कहा कि Human Rights की सुरक्षा के लिए अदालतों को 9 से 5 की सोच से बाहर निकलना होगा। अगर किसी व्यक्ति को गलत समय पर गिरफ्तारी की धमकी दी जाती है या उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता खतरे में है, तो वह किसी भी वक्त अदालत से सुनवाई की मांग कर सकता है।

‘लोगों की अदालत’ बनाना मकसद

CJI सूर्यकांत ने कहा कि उनकी कोशिश है कि Supreme Court और High Courts “People’s Court” के रूप में काम करें।

“न्याय उस समय भी मिलना चाहिए, जब ज़रूरत सबसे ज़्यादा हो – चाहे वो आधी रात ही क्यों न हो।”

उन्होंने माना कि कई संवैधानिक महत्व की याचिकाएं वर्षों से लंबित हैं। इनमें Special Intensive Revision (SIR) की वैधता को चुनौती देने वाला मामला भी शामिल है।

ज्यादा बेंच, तेज फैसले

CJI ने बताया कि ऐसे मामलों के लिए multiple judicial panels बनाने की योजना है ताकि अहम संवैधानिक प्रश्नों पर फैसले में देरी न हो।
यह बदलाव सीधे तौर पर speedy justice और fundamental rights protection से जुड़ा है।

Supreme Court की नई SOP क्या कहती है?

सुप्रीम कोर्ट ने कामकाज को और तेज़ करने के लिए Standard Operating Procedure (SOP) लागू कर दी है।

SOP की मुख्य बातें:

वकीलों को oral arguments की time limit पहले से बतानी होगी। लिखित दलीलें सुनवाई से कम से कम एक दिन पहले जमा होंगी। Senior Counsel और Advocates-on-Record पर भी समान नियम। उद्देश्य: Delay खत्म, Justice fast यानी अब कोर्ट में “आज नहीं, कल” वाला बहाना कम चलेगा।

सिस्टम पर सटायर भी जरूरी है

अब तक हालात ये थे कि “गिरफ्तारी रात में, सुनवाई सोमवार को” लेकिन नए सिस्टम के बाद तस्वीर बदल सकती है — अब अधिकार खतरे में हों तो कोर्ट भी जागेगा।

बड़ी तस्वीर क्या है?

यह पहल भारत में 24×7 Constitutional Protection की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। Human Rights activists और legal experts इसे Judiciary 2.0 Moment बता रहे हैं।

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