Middle East War: कुवैत से 20 शव लौटे, सरकार 8 मौतों की बात कर रही

Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

ताबूतों में लौटते लोग… और आंकड़ों में सिमटती मौतें। किसी के घर का बेटा, किसी की दुनिया… अब सिर्फ एक नंबर बन चुका है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल — क्या हम सच जान भी पा रहे हैं, या सिर्फ दिखाया जा रहा है?

जंग का 33वां दिन: मौत का बढ़ता हिसाब

Middle East की आग अब सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रही…यह अब घरों तक पहुंच चुकी है — खासकर भारत के। कुवैत से कोचीन एयरपोर्ट पर आई फ्लाइट में 20 शव…लेकिन विदेश मंत्रालय कहता है — सिर्फ 8 भारतीयों की मौत। दो अलग-अलग आंकड़े…दो अलग-अलग सच्चाइयाँ… जब मौत का आंकड़ा भी कन्फ्यूजन बन जाए, समझिए कहानी कहीं और है।

कुवैत से लौटे ताबूत: सिस्टम का सन्नाटा

एर्नाकुलम का एयरपोर्ट…जहां आमतौर पर स्वागत होता है, वहां इस बार खामोशी थी। 20 ताबूत उतरे…हर एक के साथ एक अधूरी कहानी।

परिवारों की आंखों में सवाल थे — “अगर सिर्फ 8 लोग मरे, तो ये बाकी 12 कौन हैं?”

ईरान-इजरायल जंग: शुरुआत से अब तक

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया…और फिर Middle East एक बार फिर युद्ध की आग में जल उठा। इस हमले में ईरान के बड़े नेता और सुरक्षा अधिकारी मारे गए। जवाब में ईरान ने भी हमला किया… और फिर शुरू हुआ ये अंतहीन सिलसिला।

33 दिन बाद भी…ना कोई जीत, ना कोई शांति… सिर्फ तबाही।  यह सिर्फ एक युद्ध नहीं, एक लंबी बर्बादी की पटकथा है।

55 लाख भारतीय वापस: या भागकर बची ज़िंदगियां?

विदेश मंत्रालय का दावा — अब तक करीब 55 लाख भारतीय वापस आ चुके हैं। सुनने में राहत की खबर लगती है…लेकिन असल में यह डर की सबसे बड़ी तस्वीर है। इतने लोग क्यों लौटे? क्या उन्हें वहां सुरक्षित महसूस नहीं हुआ?

सीजफायर की बातें, बमबारी जारी

अमेरिकी राष्ट्रपति बार-बार सीजफायर की बात करते हैं…लेकिन उसी बीच नए हमले भी हो जाते हैं। यह एक अजीब सा खेल है जहां शांति की बात भी होती है, और युद्ध भी चलता रहता है। दुनिया देख रही है…लेकिन कोई रोक नहीं पा रहा। यह सिर्फ रणनीति नहीं, एक खतरनाक विरोधाभास है।

हर संख्या के पीछे एक चेहरा होता है…एक परिवार… एक सपना…जो लोग लौटे हैं, वो सिर्फ शरीर हैं…उनके साथ उनकी अधूरी कहानियां भी आई हैं। और जो जिंदा लौटे हैं…उनके अंदर का डर अभी भी वहीं फंसा हुआ है। लेकिन सबसे बड़ा दर्द यह है कि यह सब अभी खत्म नहीं हुआ।

बड़ा सवाल: आखिर सच क्या है?

क्या वाकई सिर्फ 8 भारतीय मरे? या आंकड़ों के खेल में कुछ छुपाया जा रहा है? क्या सरकारें सच बता रही हैं…या सिर्फ panic control कर रही हैं? और सबसे अहम  क्या हम एक और बड़े संकट के मुहाने पर खड़े हैं?

जंग सिर्फ बॉर्डर पर नहीं लड़ी जाती…उसकी गूंज घरों तक पहुंचती है। आज 20 ताबूत लौटे हैं…कल शायद और आएंगे…और सबसे खतरनाक बात —हम धीरे-धीरे इस दर्द के आदी होते जा रहे हैं। क्योंकि जब मौत भी ‘न्यूज’ बन जाए…तो समझ लीजिए, इंसानियत कहीं पीछे छूट चुकी है।

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