
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज़ हो गई है। उन्नाव रेप कांड के मुख्य आरोपी और पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को लेकर आई खबर ने सियासी गलियारों में बेचैनी बढ़ा दी है। दिल्ली हाई कोर्ट ने उम्रकैद की सजा पर रोक लगाते हुए सेंगर को जमानत दे दी है। हालांकि, CBI ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जहां मामला अभी विचाराधीन है।
जब उन्नाव में “सेंगर इज़ द सिस्टम”
एक दौर था जब उन्नाव की राजनीति में बिना कुलदीप सेंगर की मर्जी के कुछ भी मुमकिन नहीं माना जाता था। ग्राम प्रधान से लेकर चार बार विधायक बनने तक, उन्होंने सत्ता और दबदबे का ऐसा नेटवर्क खड़ा किया कि पार्टी नहीं, पार्टी टिकट उन्हें ढूंढती थी।
यह वही राजनीति थी जहां विचारधारा से ज्यादा वोट-मैनेजमेंट और डर का गणित काम करता था।
ग्राम प्रधानी से शुरू हुआ ‘Power Politics’
1996 में ग्राम प्रधान बनने से शुरू हुआ सेंगर का सफर धीरे-धीरे Family-Centric Power Model में बदल गया।
- मां दो बार ग्राम प्रधान
- छोटे भाई की पत्नी भी प्रधान
- पत्नी जिला पंचायत अध्यक्ष (निर्दलीय जीत)
फतेहपुर मूल के सेंगर ने उन्नाव को अपना Political Fortress बना लिया।
बसपा → सपा → बीजेपी: Ideology नहीं, Influence
कुलदीप सिंह सेंगर की राजनीति में दल बदलना Strategy था, मजबूरी नहीं।
- 2002: BSP से उन्नाव सदर जीत
- 2007: SP से बांगरमऊ विधायक
- 2012: भगवंतनगर से जीत
- 2017: BJP में शामिल होकर फिर विधायक
संदेश साफ था — “चेहरा मेरा है, पार्टी बदल सकती है।”

Unnao Rape Case: जब सत्ता का घमंड टूटा
2017 में सत्ता की ऊंचाई पर पहुंचे सेंगर पर नाबालिग से रेप का आरोप लगा। मामला सिर्फ कोर्ट तक सीमित नहीं रहा —
- पीड़ित परिवार की आत्मदाह की कोशिश
- सड़क हादसे में परिवार के लोगों की मौत
- देशभर में आक्रोश
अंततः कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई, विधायकी गई और बाहुबली की छवि सलाखों के पीछे पहुंच गई।
जमानत के बाद फिर सवाल
कई साल जेल में रहने के बाद अब जमानत मिलने से पीड़ित परिवार में डर। राजनीतिक हलकों में बेचैनी और सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो चुकी है। सवाल वही है — “क्या कानून की प्रक्रिया और न्याय की भावना एक ही दिशा में चल रही हैं?”
करोड़ों की संपत्ति, टूटा हुआ साम्राज्य
2007 में 36 लाख की संपत्ति से शुरू होकर 2017 तक करीब 3 करोड़ (घोषित) की संपत्ति। लखनऊ और उन्नाव में महंगे बंगले, कीमती जमीनें, राजनीतिक रिश्तेदारों का नेटवर्क। हालांकि, आज यह साम्राज्य कानूनी लड़ाई और सार्वजनिक आक्रोश के बीच सिमट चुका है।
जिस सिस्टम में कभी कहा जाता था — “सेंगर को छूना मुश्किल है” आज वही सिस्टम पूछ रहा है — “Justice delayed or justice tested?”
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