नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करेगा। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत 12 विपक्षी दलों के नेताओं की संयुक्त याचिका पर अदालत विचार करेगी। याचिका में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया, मतदाताओं के नाम हटाने के तरीके और निर्वाचन आयोग के फैसले लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। मामले में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अलावा चुनाव आयुक्त डॉ. एसएस संधू और डॉ. विवेक जोशी को भी नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
12 विपक्षी नेताओं ने संयुक्त रूप से दाखिल की याचिका
विपक्षी नेताओं की ओर से यह याचिका 12 अक्टूबर को अधिवक्ता एस. प्रसन्ना के माध्यम से दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ताओं में राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, एनसीपी (एसपी) की नेता सुप्रिया सुले और शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत समेत अन्य विपक्षी नेता शामिल हैं।
याचिका को रिट याचिका संख्या 1351/2026 के तहत दर्ज किया गया है। इसे मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष संबंधित मामले के तौर पर सूचीबद्ध किया गया है। यह मामला राकेश कुमार सिंह की उस याचिका से भी जुड़ा है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ क्वो वारंटो रिट जारी करने की मांग की गई है।
निर्वाचन आयोग से फाइलें और बैठक का ब्योरा मांगने की अपील
विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट से निर्वाचन आयोग की संबंधित फाइलें, बैठकों के कार्यवृत्त और आधिकारिक टिप्पणियां तलब करने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि इन दस्तावेजों के जरिए यह जांचा जा सके कि आयोग ने अपने फैसले निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार लिए या नहीं।
याचिका में यह भी जांचने की मांग की गई है कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त ने विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान आयोग की सामूहिक शक्तियों का इस्तेमाल अकेले किया था। याचिकाकर्ताओं ने निर्वाचन आयोग के निर्णय लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की जरूरत बताई है।
मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पर सवाल
याचिका में कानूनी फॉर्म-6 में कथित बदलाव और ECINet तथा ERONet मतदाता सूची डेटाबेस की संरचना एवं संचालन पर भी सवाल उठाए गए हैं। विपक्षी नेताओं ने उचित नोटिस और सुनवाई का अवसर दिए बिना मतदाताओं के नाम हटाए जाने की प्रक्रिया को चुनौती दी है।
याचिकाकर्ताओं ने मतदाता सूची से हटाए गए नामों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की है। साथ ही, मतदाताओं के नाम हटाने के कारणों की जानकारी सार्वजनिक करने और बूथवार विवरण उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।
याचिका में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इसका उद्देश्य विशेष गहन पुनरीक्षण की वैधता को दोबारा चुनौती देना नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 को एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स बनाम निर्वाचन आयोग मामले में इस प्रक्रिया को बरकरार रखा था।
15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने जारी किए थे नोटिस
इस मामले में 15 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी किए थे। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में पक्ष रखा था।
सुनवाई के दौरान वकीलों ने राहुल गांधी के अदालत तक मार्च का उल्लेख किया था। इस पर पीठ ने कहा था कि कोई भी न्यायपालिका को डरा नहीं सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि वह एक याचिकाकर्ता से उसके व्यवहार के संबंध में सवाल करेगी। हालांकि, इस दौरान संबंधित व्यक्ति का नाम नहीं लिया गया था।
निर्वाचन आयोग ने हलफनामे में आरोपों को नकारा
निर्वाचन आयोग ने मुख्य मामले में संक्षिप्त हलफनामा दाखिल कर मुख्य चुनाव आयुक्त पर एकतरफा फैसले लेने के आरोपों से इनकार किया है। आयोग के मुताबिक, 24 जून 2025, 27 अक्टूबर 2025 और 14 मई 2026 को जारी किए गए तीनों विशेष गहन पुनरीक्षण संबंधी आदेश सर्वसम्मति से लिए गए निर्णयों के आधार पर जारी हुए थे।
आयोग ने यह भी कहा कि चुनाव आयुक्तों की ओर से फाइलों पर दर्ज टिप्पणियों को आयोग के आधिकारिक फैसले के तौर पर नहीं देखा जा सकता। हलफनामे के अनुसार, जरूरी मामलों में चुनाव आयुक्त इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अपनी मंजूरी देते हैं और बाद में इसे संबंधित फाइल में दर्ज किया जाता है।
फॉर्म-6 में बदलाव के आरोपों पर निर्वाचन आयोग ने दलील दी कि उसने इस फॉर्म में कोई संशोधन नहीं किया है, क्योंकि ऐसा करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। आयोग ने यह भी कहा कि याचिका एक समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट पर आधारित है और ऐसी रिपोर्ट को अपने आप में निर्णायक सबूत नहीं माना जा सकता।
