नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की शुरुआत किसी राजनीतिक रणनीति या बड़ी बैठक से नहीं हुई थी। इसके संस्थापक अभिजीत दीपके के मुताबिक, अमेरिका के बोस्टन में वह एक शाम प्लेस्टेशन पर FIFA खेल रहे थे और इसी दौरान उन्हें पार्टी बनाने का विचार आया। उस समय वह नौकरी की तलाश और आवेदन को लेकर तनाव में थे। तभी उनकी नजर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक टिप्पणी पर पड़ी, जिसे उन्होंने अपमानजनक माना। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच’ को लेकर एक व्यंग्यात्मक पोस्ट लिखी और फिर FIFA खेलने में लग गए।
दीपके के मुताबिक, उनकी पोस्ट धीरे-धीरे युवाओं के बीच चर्चा में आने लगी। बोस्टन में रात करीब 10 से 11 बजे के बीच उन्होंने इस नए संगठन का नाम ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ रखने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने पार्टी की सदस्यता के लिए कुछ व्यंग्यात्मक नियम भी बनाए।
बेरोजगार, आलसी और शिकायत करने वालों के लिए सदस्यता
दीपके ने बताया कि पार्टी में शामिल होने के लिए बेरोजगार, आलसी और पेशेवर तरीके से शिकायत करने में सक्षम होने जैसी शर्तें रखी गईं। उनका कहना था कि ये वही शब्द थे, जिनका इस्तेमाल अक्सर युवाओं को नीचा दिखाने के लिए किया जाता था। संभवतः यही वजह रही कि बड़ी संख्या में युवा इस पहल से जुड़ने लगे।
एक घंटे में बढ़ने लगी संख्या, दो घंटे में 5000 पंजीकरण
दीपके ने सदस्यता के लिए गूगल फॉर्म तैयार किया और AI की मदद से कुछ तस्वीरें भी बनाईं। उन्हें उम्मीद थी कि करीब 100 से 200 लोग ही पंजीकरण करेंगे। लेकिन फॉर्म जारी होने के बाद लोगों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी। करीब एक घंटे में पंजीकरण तेजी से बढ़ा और दो घंटे के भीतर लगभग 5,000 लोगों ने अपना पंजीकरण करा लिया।
इसके बाद दीपके को खुद समझ नहीं आया कि आगे क्या करना है और वह सो गए। अगली सुबह जब उन्होंने फॉर्म देखा तो करीब 12 घंटे में लगभग 50 हजार लोग इस पहल से जुड़ चुके थे। इसके बाद उन्होंने इसे गंभीरता से आगे बढ़ाने का फैसला किया।
बेरोजगारी और परीक्षा गड़बड़ी के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन
कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन बेरोजगारी, परीक्षाओं में गड़बड़ी और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर आगे बढ़ा। धीरे-धीरे यह युवाओं के एक बड़े आंदोलन के रूप में सामने आया। दिल्ली के जंतर-मंतर पर लंबे समय तक चले प्रदर्शन में प्रदर्शनकारियों ने कई मांगें उठाईं। इनमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी शामिल थी।
25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP ने इसे अपने आंदोलन की बड़ी सफलता बताया और प्रदर्शन समाप्त कर दिया। इसके बाद संगठन ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार, छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने और पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिलाने जैसे मुद्दे उठाना जारी रखा।
अब स्कूलों की बदहाली और शिक्षकों की कमी का मुद्दा
फिलहाल कॉकरोच जनता पार्टी स्कूलों की बदहाली और शिक्षकों की कमी जैसे मुद्दों को उठा रही है। संगठन की ओर से 5 सितंबर को दिल्ली में मार्च निकालने की घोषणा भी की गई है।
