देश का विकास तभी संभव, जब विकास की राह में कोई पीछे न छूटे ….न्यायमूर्ति समित गोपाल

न्याय समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे, अधिकारों के प्रति जागरूकता के साथ अधिकारियों की संवेदनशीलता भी जरूरी

बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में वृहद विधिक साक्षरता एवं सहायता शिविर आयोजित, लाभार्थियों को वितरित किए गए चेक, आवास की चाबियां और सहायता उपकरण

झाँसी। देश का वास्तविक विकास तभी संभव है, जब विकास की राह में कोई भी व्यक्ति पीछे न छूटे। न्याय केवल उन्हीं लोगों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, जो अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हैं, बल्कि उन जरूरतमंद और वंचित लोगों तक भी पहुँचना चाहिए, जो अपनी पीड़ा व्यक्त करने या न्याय मांगने में सक्षम नहीं हैं। न्यायपालिका और शासन की जिम्मेदारी है कि कोई भी व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे। यह विचार इलाहाबाद उच्च न्यायालय के प्रशासनिक न्यायमूर्ति समित गोपाल ने रविवार को बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के गांधी सभागार में आयोजित वृहद विधिक साक्षरता एवं सहायता शिविर का उद्घाटन करते हुए व्यक्त किए। इसका आयोजन झांसी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के बाबू जगजीवन राम विधि संस्थान के तत्वाधान में किया गया।


उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, झाँसी के तत्वावधान में आयोजित शिविर में न्यायमूर्ति समित गोपाल ने विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को सहायता सामग्री, प्रतीकात्मक चेक एवं स्वीकृति पत्र वितरित किए। इस दौरान न्यायिक अधिकारियों के साथ जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।


मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति समित गोपाल ने कहा कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) की ‘न्याय चला निर्धन के द्वार’ की संकल्पना को साकार करने के लिए समाज के अंतिम व्यक्ति तक कानूनी जागरूकता और निःशुल्क विधिक सहायता पहुँचाना आवश्यक है। न्याय व्यवस्था अब ऐसे दौर में प्रवेश कर रही है, जहाँ न्यायपालिका और शासन को यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी नागरिक न्याय से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि देश में जनकल्याण के लिए अनेक प्रभावी कानून और योजनाएँ बनाई गई हैं, लेकिन उनका वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब पात्र नागरिकों को उनकी जानकारी होगी और उन्हें लागू करने वाले अधिकारी एवं कर्मचारी संवेदनशील होंगे।


उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की समृद्धि और सशक्तीकरण के लिए नागरिकों का अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूक होना जरूरी है। विधिक जागरूकता दोतरफा प्रक्रिया है, जो व्यक्ति को उसके अधिकारों के साथ समाज के प्रति दायित्वों का भी बोध कराती है। प्रत्येक व्यक्ति की स्वतंत्रता वहीं तक है, जहाँ से दूसरे व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन शुरू होता है।

उन्होंने न्यायपालिका, प्रशासन और गैर-सरकारी संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय पर जोर देते हुए कहा कि सभी संस्थाओं का साझा उद्देश्य समाज के प्रत्येक व्यक्ति का कल्याण होना चाहिए। न्यायमूर्ति गोपाल ने शिविर में विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन कर प्रयासों की सराहना भी की।


जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्ष कमलेश कच्छल ने कहा कि जरूरतमंद को केवल आश्वासन नहीं, समयबद्ध समाधान मिले।शिविर का उद्देश्य केवल कुछ लाभार्थियों को सरकारी योजनाओं का लाभ देना नहीं, बल्कि संविधान में निहित सामाजिक न्याय और कल्याणकारी समाज की संकल्पना को साकार करना है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 39-ए का उल्लेख करते हुए कहा कि समान न्याय एवं निःशुल्क विधिक सहायता की व्यवस्था तभी सार्थक होगी, जब समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को अपने अधिकारों की जानकारी और सरकारी योजनाओं का लाभ बिना बाधा के मिल सके।


उन्होंने कहा कि जानकारी के अभाव और जटिल प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण पात्र नागरिक भी अपने अधिकारों से वंचित रह जाते हैं। यह शिविर महज औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि न्यायपालिका और प्रशासन की संयुक्त जवाबदेही का प्रतीक है। अधिकारियों को सुनिश्चित करना चाहिए कि जरूरतमंदों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि समयबद्ध और ठोस समाधान मिले।

उन्होंने फरवरी में आयोजित वृहद विधिक सहायता शिविर की सफलता का उल्लेख करते हुए निःशुल्क विधिक सहायता, बंदियों के अधिकारों तथा शिक्षण संस्थानों में पॉक्सो अधिनियम संबंधी जागरूकता अभियानों की जानकारी दी।


स्वागत संबोधन में जिलाधिकारी गौरांग राठी ने मुख्य अतिथि सहित सभी मंचासीन अतिथियों का अभिनंदन करते हुए कहा कि न्यायपालिका, पुलिस और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से विधिक सहायता एवं जनकल्याणकारी योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाया जाएगा। उन्होंने न्यायमूर्ति समित गोपाल को आश्वस्त किया कि यह अभियान शिविर तक सीमित नहीं रहेगा। न्याय और कल्याणकारी योजनाओं को हर जरूरतमंद के द्वार तक पहुँचाएंगे। गाँवों में वॉल पेंटिंग, फ्लेक्स और अन्य प्रचार माध्यमों से इसका व्यापक एवं स्थायी प्रचार-प्रसार किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक पात्र नागरिक अपने अधिकारों और उपलब्ध सुविधाओं से जुड़ सकें।

लाभार्थियों को मिले चेक, आवास की चाबियां और सहायता उपकरण

शिविर में न्यायमूर्ति समित गोपाल ने जिलाधिकारी गौरांग राठी एवं मुख्य विकास अधिकारी रामेश्वर सुधाकर की उपस्थिति में जरूरतमंद लाभार्थियों को व्हीलचेयर एवं वॉकिंग स्टिक प्रदान कीं। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के अंतर्गत उद्योग विभाग की ओर से अजीम हैदर, सिमरन बानो, राधा देवी, विनोद रायकवार, विशाल, नेहा, प्रियंका एवं विजय को प्रतीकात्मक चेक वितरित किए गए। मुख्यमंत्री आवास योजना के लाभार्थी अन्नू देवी, श्याम सुंदर, सुनीता, छाया एवं शांति को आवास की प्रतीकात्मक चाबियां सौंपी गईं। वहीं, मत्स्य विभाग की योजना के अंतर्गत हेमंत, शंकर, राजाराम एवं हन्नू को मोपेड की चाबियां प्रदान की गईं।

30 से अधिक प्रदर्शनी स्टॉलों पर दिखीं सरकारी योजनाएं और स्थानीय उत्पाद
शिविर में जिला प्रशासन द्वारा विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी विभागों और संस्थानों के सहयोग से 30 से अधिक स्टॉल लगाए गए। इनमें बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के बुंदेलखंड विकास संस्थान एवं सेवा संस्थान, जिला कारागार झाँसी की हस्तनिर्मित वस्तुओं, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के अंतर्गत झाँसी की प्रसिद्ध बालूशाही तथा एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के खिलौनों के स्टॉल प्रमुख रहे। मोंठ विकासखंड के प्राथमिक शिक्षा विभाग ने शिक्षण-अधिगम सामग्री (टीएलएम) प्रदर्शित की। इसके अतिरिक्त बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग, महिला एवं बाल कल्याण विभाग, कृषि विभाग, जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा), श्रम विभाग, पर्यटन विभाग तथा खाद्य एवं रसद विभाग सहित विभिन्न विभागों ने अपनी योजनाओं एवं सेवाओं की जानकारी दी।


दिव्यांग बच्चों की सरस्वती वंदना ने मोहा मन
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात दिव्यांग बच्चों शुभम एवं नंदिनी ने सरस्वती वंदना की सुमधुर प्रस्तुति दी। इस अवसर पर न्यायमूर्ति समित गोपाल की धर्मपत्नी का पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मान किया गया।


समापन अवसर पर बाबू जगजीवन राम विधि संस्थान के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रशांत मिश्रा ने आभार में न्यायमूर्ति समित गोपाल को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। अन्य मंचासीन अतिथियों को भी स्मृति चिह्न प्रदान किए गए।


कार्यक्रम का संयुक्त संचालन सिविल जज (जूनियर डिवीजन) अंजली एवं अपर सिविल जज (जूनियर डिवीजन) अमन राय ने किया। आभार ज्ञापन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के नोडल अधिकारी एवं अपर जिला जज शरद कुमार चौधरी ने किया।


कार्यक्रम में झांसी के मुख्य विकास अधिकारी रामेश्वर सुधाकर, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विकास कुमार, परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश आर.के. श्रीवास्तव, कमर्शियल कोर्ट के पीठासीन अधिकारी राजेश राय, पीठासीन अधिकारी मीता एवं वी.के. जायसवाल, जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष प्रमोद शिवहरे, सचिव छोटेलाल तथा बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के बाबू जगजीवन राम विधि संस्थान के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रशांत मिश्रा सहित अन्य न्यायिक अधिकारी जज नियाज़ अहमद अंसारी, जज आदित्य चतुर्वेदी, जज नेत्रपाल सिंह जज कमलकांत श्रीवास्तव, जज अनुभवा द्विवेदी, जज शिव कुमार तिवारी सहित कई अधिवक्ता, प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के शिक्षक डॉ राघवेन्द्र दीक्षित, डॉ महेंद्र कुमार, डॉ अभिषेक शुक्ला, डॉ मंजू कौर, डॉ अपर्णा अग्रवाल, डॉ संदीप वर्मा, रितु शर्मा आदि उपस्थित रहे।

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