
दिल्ली हाईकोर्ट ने लॉ छात्रों के पक्ष में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा है — “Attendance कम है? No Problem!”
कोर्ट ने साफ कहा कि सिर्फ न्यूनतम उपस्थिति की कमी के आधार पर किसी भी लॉ स्टूडेंट को परीक्षा देने से नहीं रोका जा सकता। यह फैसला उस समय आया जब कोर्ट ने लॉ छात्र सुषांत रोहिल्ला की आत्महत्या के मामले में स्वत: संज्ञान लिया।
जस्टिस प्रतिभा एम सिंह की सख्त टिप्पणी:
जस्टिस प्रतिभा एम सिंह की बेंच ने कहा, “सख्त अटेंडेंस नियम छात्रों में मानसिक तनाव और आत्महत्या जैसी घटनाओं का कारण नहीं बनना चाहिए। किसी युवा जीवन की कीमत Attendance से ज़्यादा नहीं हो सकती।”
कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को अनिवार्य उपस्थिति नियमों में संशोधन करने का निर्देश दिया है ताकि कोई संस्थान “फिजिकल उपस्थिति” के नाम पर छात्रों का भविष्य बर्बाद न करे।
कॉलेजों को झटका — BCI को चेतावनी!
कोर्ट ने कहा कि देश के किसी भी लॉ कॉलेज या यूनिवर्सिटी में उपस्थिति की कमी के कारण किसी छात्र को परीक्षा या करियर प्रगति से नहीं रोका जाएगा। साथ ही BCI के तय न्यूनतम नियमों से ज़्यादा सख्त Attendance Policy कोई भी कॉलेज लागू नहीं कर सकेगा।
कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि सभी संस्थान UGC के अनुसार शिकायत निवारण समिति (Grievance Redressal Committee) बनाएं, ताकि छात्रों की समस्याएं समय पर सुलझाई जा सकें।
Overload पर कोर्ट की चुटकी:
कोर्ट ने शिक्षा व्यवस्था पर व्यंग्य करते हुए कहा — “कॉलिजों में सिस्टम की इतनी ‘Overdose’ हो गई है कि पढ़ाई से ज़्यादा Attendance App अपडेट करना जरूरी हो गया है!”

छात्रों के हित में कोर्ट ने कहा कि अब समय आ गया है कि कम कठोर और व्यवहारिक नियम बनाए जाएं ताकि “Classroom से ज़्यादा Stressroom” वाली स्थिति खत्म हो।
क्या बदलने जा रहा है अब?
- Attendance की कमी पर अब Exam से रोकना मना
- BCI को नियमों में संशोधन करना होगा
- कॉलेज अतिरिक्त कठोर Attendance Policy नहीं बना सकेंगे
- हर संस्थान में शिकायत निवारण समिति अनिवार्य
‘अटेंडेंस बाबा की जय!’
अब छात्र कह रहे हैं — “जज साहब, आपने तो attendance की जंजीरें तोड़ दीं!” “अब Class bunk करने का अपराध नहीं, Fundamental Right बन गया है!”
दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला न केवल लॉ छात्रों के लिए बल्कि पूरे शिक्षा जगत के लिए एक Wake-up Call है। कानून के छात्रों ने राहत की सांस ली है — अब ‘कितनी क्लास लगी?’ से ज़्यादा मायने रखेगा ‘कितना सीखा?’
स्कूल के बाहर ‘नशे की क्लास’ — 10 मीटर दूर बिक रही है हेरोइन- पुलिस भी…
