Delhi EV Policy 2026: 5 लाख तक का फायदा या बढ़ेगा ट्रैफिक जाम? नई ईवी नीति का पूरा गणित समझिए

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में 1 जुलाई से नई इलेक्ट्रिक वाहन (EV) नीति 2.0 लागू होने जा रही है। दिल्ली कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद यह नीति उपराज्यपाल की स्वीकृति के साथ प्रभावी होगी। सरकार का दावा है कि नई नीति से प्रदूषण में कमी आएगी, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा मिलेगा और लोगों को लाखों रुपये तक का आर्थिक लाभ होगा। हालांकि विशेषज्ञों का एक वर्ग मानता है कि इससे सड़कों पर वाहनों की संख्या बढ़ने से ट्रैफिक दबाव भी बढ़ सकता है।

नई ईवी नीति में सब्सिडी, रोड टैक्स छूट, स्क्रैपिंग इंसेंटिव और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार जैसे कई बड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं। आइए जानते हैं कि इस नीति से आम लोगों, पर्यावरण और परिवहन व्यवस्था पर क्या असर पड़ सकता है।

30 लाख तक की ईवी खरीदने पर बड़ा आर्थिक फायदा

नई नीति के तहत 30 लाख रुपये तक की कीमत वाले इलेक्ट्रिक चार पहिया वाहन पर रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क पूरी तरह माफ रहेगा। इसके अलावा पुराना वाहन स्क्रैप कराने पर एक लाख रुपये तक का प्रोत्साहन और अतिरिक्त छूट भी मिलेगी।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 30 लाख रुपये तक की इलेक्ट्रिक कार खरीदने वाले व्यक्ति को कुल मिलाकर लगभग 5 लाख रुपये तक का लाभ मिल सकता है। इसमें रोड टैक्स, पंजीकरण शुल्क, स्क्रैपिंग इंसेंटिव और सब्सिडी शामिल हैं।

2027 से सिर्फ ई-ऑटो, 2028 से केवल ई-दोपहिया का रजिस्ट्रेशन

दिल्ली सरकार ने चरणबद्ध तरीके से पारंपरिक ईंधन आधारित वाहनों को कम करने की रणनीति बनाई है। इसके तहत 1 जनवरी 2027 से राजधानी में नए ऑटो रिक्शा के रूप में केवल इलेक्ट्रिक ऑटो का ही पंजीकरण होगा।

वहीं 1 अप्रैल 2028 से नए दोपहिया वाहनों के पंजीकरण में भी केवल इलेक्ट्रिक वाहनों को अनुमति देने की योजना बनाई गई है। सरकार का मानना है कि इससे वाहनों से होने वाले प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आएगी।

क्या कम होगा प्रदूषण?

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार दिल्ली में प्रदूषण का बड़ा हिस्सा व्यावसायिक मालवाहक वाहनों और दोपहिया-तीपहिया वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जन से आता है। इसी वजह से नई नीति में इन श्रेणियों को प्राथमिकता दी गई है।

परिवहन आयुक्त निहारिका राय के मुताबिक राजधानी के कुल प्रदूषण में लगभग 33 प्रतिशत हिस्सेदारी व्यावसायिक वाहनों की है, जबकि दोपहिया और तीन पहिया वाहन भी बड़ी मात्रा में प्रदूषण फैलाते हैं। ऐसे में इलेक्ट्रिक वाहनों का विस्तार पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

लाखों पुराने वाहन इलेक्ट्रिक में बदलने की उम्मीद

दिल्ली में हर वर्ष करीब 5 लाख पेट्रोल, डीजल और सीएनजी वाहन बिकते हैं, जबकि इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री लगभग 70 हजार के आसपास है। नई नीति लागू होने के बाद आने वाले वर्षों में बड़ी संख्या में पुराने वाहनों के स्थान पर इलेक्ट्रिक वाहन अपनाए जाने की संभावना जताई जा रही है।

परिवहन विभाग का अनुमान है कि वर्ष 2030 तक राजधानी में लाखों वाहन इलेक्ट्रिक श्रेणी में परिवर्तित हो सकते हैं।

क्या बढ़ जाएगा ट्रैफिक जाम?

नई नीति को लेकर एक चिंता भी सामने आई है। परिवहन विभाग के पूर्व उप आयुक्त अनिल छिकारा का मानना है कि सब्सिडी और वित्तीय प्रोत्साहनों के कारण लोग अतिरिक्त निजी वाहन खरीदने के लिए प्रेरित हो सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार यदि लोग सार्वजनिक परिवहन के बजाय निजी इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता देते हैं, तो राजधानी में ट्रैफिक जाम और सड़क दबाव बढ़ सकता है।

रोजगार और उद्योग को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

ईवी नीति से ऑटोमोबाइल उद्योग और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। कई वाहन कंपनियां पहले ही इलेक्ट्रिक कार, ऑटो और मालवाहक वाहनों के नए मॉडल बाजार में उतार चुकी हैं।

सरकार अगले चार वर्षों में 32 हजार नए ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने जा रही है। इससे न केवल निवेश बढ़ेगा बल्कि तकनीकी, संचालन और रखरखाव क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

दिल्ली की सब्सिडी अन्य राज्यों से ज्यादा

हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में पहले से ईवी नीति लागू है। हालांकि दिल्ली सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों पर मिलने वाली आर्थिक सहायता और कर छूट को कई राज्यों की तुलना में अधिक आकर्षक बनाया है।

यही वजह है कि नई नीति को देश की सबसे आक्रामक इलेक्ट्रिक वाहन प्रोत्साहन योजनाओं में से एक माना जा रहा है।

तीन साल तक दिल्ली के बाहर नहीं बेच सकेंगे वाहन

सरकार ने सब्सिडी के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी विशेष प्रावधान किया है। ईवी खरीद पर सरकारी लाभ लेने वाले वाहन मालिक तीन वर्षों तक वाहन को दिल्ली के बाहर स्थानांतरित नहीं कर सकेंगे।

ऐसे वाहनों को तीन साल तक एनओसी जारी नहीं की जाएगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सब्सिडी का लाभ केवल दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए उपयोग हो।

नए पोर्टल से मिलेगी सब्सिडी

ईवी खरीदने वाले लाभार्थियों को सब्सिडी और प्रोत्साहन राशि सीधे बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाएगी। इसके लिए नया ईवी पोर्टल तैयार किया गया है, जिसे 1 जुलाई के बाद लॉन्च किया जाएगा। आवेदन स्वीकृत होने के बाद 60 दिनों के भीतर राशि खाते में भेजने की व्यवस्था की गई है।

विशेषज्ञ बोले- 100% ईवी से आधा हो सकता है प्रदूषण

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में राजधानी में अधिकांश वाहन इलेक्ट्रिक हो जाते हैं तो प्रदूषण में भारी कमी लाई जा सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार दिल्ली में कुल प्रदूषण में वाहनों की हिस्सेदारी 42 प्रतिशत तक मानी जाती है, जो सर्दियों में बढ़कर 50 प्रतिशत तक पहुंच जाती है।

ऐसे में इलेक्ट्रिक वाहनों का तेजी से विस्तार दिल्ली की स्वच्छ हवा की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।

 

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