“रेसलिंग छोड़, अब स्वर्ग में फाड़ रहे शर्ट – हल्क होगन नहीं रहे!”

रेसलिंग की दुनिया में एक युग का अंत हो गया। टेरी जीन बोलिया, जिन्हें दुनिया हल्क होगन के नाम से जानती है, का गुरुवार 24 जुलाई को 71 वर्ष की आयु में कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया। रिंग में अपनी अनोखी एंट्री, फटी हुई शर्ट और दमदार आवाज़ से उन्होंने 80s-90s की WWE को घर-घर पहुंचा दिया। सिर्फ रिंग में ही नहीं, स्क्रीन पर भी मचाया धमाल हल्क सिर्फ पंच-लाइनों तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने VH1 का रियलिटी शो “Hogan Knows Best” किया, कुछ फिल्मों में सुपरहीरो की एक्टिंग…

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75 साल के नसीर साहब: जिनकी असली एक्टिंग ऑफ स्क्रीन भी चलती रही

1975 में ‘निशांत’ से फिल्मी करियर की शुरुआत करने वाले नसीरुद्दीन शाह जब पहली बार पर्दे पर आए, तो खुशी के बजाय उदासी ज़्यादा थी। दूरदर्शन में रिजेक्शन, निजी जीवन की उथल-पुथल और कलाकार के रूप में पहचान बनाने की जद्दोजहद – ये सब उनकी कहानी के अहम हिस्से हैं। पिता से दूरी, माँ से गहरा लगाव नसीर के अपने पिता से संबंध बहुत अच्छे नहीं थे। पर उनकी माँ, जो ग़ुस्से में भी स्नेह लुटाती थीं, हमेशा उनका सहारा बनी रहीं। उनकी आत्मकथा ‘And Then One Day’ में माँ…

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Suraj (1966) Movie Review: राजेंद्र कुमार की आखिरी सुपरहिट

टी. प्रकाश राव के निर्देशन में बनी फिल्म ‘सूरज’, राजसी प्रेम कहानी को उस दौर की मसालेदार बॉलीवुड स्टाइल में परोसती है। यहाँ नायक सूरज सिंह (राजेंद्र कुमार) सिर्फ दिल चुराता नहीं, बल्कि राजकुमारी भी चुरा लेता है – वो भी घोड़े पर बैठकर, जैसे हॉलीवुड और राजश्री की फिल्मों में होता है। कथानक: कौन राजकुमार, कौन डाकू? राजकुमार प्रताप की गद्दी पर बैठा है वो, जो असल में संग्राम सिंह का बेटा है! और असली राजकुमारी को डाकू सूरज उठा ले जाता है — बस यहीं से शुरू होती…

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रेट्रो रिव्यू – हाथी मेरे साथी: राजू, हाथी और ड्रामा का तगड़ा झगड़ा!

1971 में रिलीज़ हुई “हाथी मेरे साथी” एक ऐसी फिल्म है जो न केवल राजेश खन्ना की दमदार एक्टिंग के लिए जानी जाती है, बल्कि अपने हाथियों और जंगली जानवरों के साथ दोस्ती के लिए भी मशहूर हुई।इस फिल्म को एम.ए. थिरुमुगम ने डायरेक्ट किया, जबकि पटकथा लिखी थी हिंदी सिनेमा के दो जादूगरों, सलीम-जावेद ने।अगर आपने सोचा कि ये कहानी सिर्फ रोमांस और ड्रामा है — नहीं, इसमें आपके दोस्त हाथी भी शामिल हैं, जो आपकी तुलना में ज्यादा ट्रबल शूटर साबित होते हैं। कहानी: अनाथ राजू और उसके…

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रेट्रो रिव्यू फौलाद: दारा सिंह और मुमताज ने 60s के पर्दे पर आग लगा दी

फौलाद की कहानी सीधे-साधे प्रेम से नहीं, बल्कि शाही दरबार की भविष्यवाणी, जातिगत पृष्ठभूमि, और सत्ता की भूख से शुरू होती है। एक महाराजा जब यह सुनता है कि उसकी बेटी किसी “नीच जाति” के युवक से शादी करेगी और उसकी गद्दी खतरे में पड़ जाएगी, तो वह सारे नवजात निम्न जाति के लड़कों को मरवाने का आदेश देता है।“इतिहास गवाह है – जब नेताओं को अपनी कुर्सी डगमगाती दिखे, तो उनका पहला निशाना आम जनता ही होती है – फिर चाहे वो फिल्म हो या संसद।” अमर बना फौलाद…

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सरदार जस्सी लौटे हैं! इस बार हंसाते-हंसाते सिक्स पैक बना देंगे

2012 में आई “सन ऑफ सरदार” के बाद अब ‘जस्सी’ की वापसी हो चुकी है — और वो भी डबल डोज़ कॉमेडी के साथ।1 अगस्त को रिलीज़ हो रही “सन ऑफ सरदार 2” का दूसरा ट्रेलर देखकर लग रहा है जैसे हंसी खुद popcorn लेकर बैठ गई हो। इस बार जस्सी की नई मुसीबतें हैं, नई कशमकश है और नया ट्विस्ट — संजय दत्त आउट, रवि किशन इन! और हां, दीपक डोबरियाल अब सिर्फ किरदार नहीं निभा रहे… वो “सरप्राइज बॉक्स” बन गए हैं! रवि किशन बने नए सरदार —…

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आया सावन झूम के (1969) रेट्रो रिव्यू: धर्मेन्द्र फंस गए इमोशनल मडस्लाइड में

बारिश, मंदिर, बेबी ड्रॉप-ऑफ और धर्म संकट – एकदम 60s क्लासिक सेटअप।निरूपा रॉय यहां भी ट्रेजेडी का पैकेज लेकर आती हैं – नौकरानी बनी हैं, गलती से मालिक को मार बैठती हैं और फिर बेटा छोड़ देती हैं। इससे ज़्यादा बैकस्टोरी अगर Netflix पे होता, तो 3 सीज़न में भी खत्म न हो! धर्मेन्द्र vs भावनाएं: जयशंकर उर्फ़ जय (धर्मेन्द्र) बिजनेस मैन हैं, मगर दिल से Confusion-प्रेमी। आरती (आशा पारेख) से रोमांस शुरू हुआ ही था कि उन्होंने उसके बाप को अनजाने में गाड़ी से कुचल दिया (जैसे गलती से…

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‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ में तुलसी के साथ मौनी रॉय की कैमियो वापसी

25 साल बाद, एकता कपूर का सुपरहिट फैमिली ड्रामा ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ एक बार फिर लौटने जा रहा है — बिल्कुल नए अंदाज़ और ताज़ा चेहरों के साथ। स्मृति ईरानी का कैमियो, विरासत को मिलेगा नया चेहरा भले ही स्मृति ईरानी अब राजनीति में सक्रिय हैं, लेकिन फैंस के लिए खुशखबरी है कि वो ‘तुलसी विरानी’ के रोल में कैमियो करती नज़र आएंगी। उन्होंने हाल ही में प्रोमो रिलीज कर शो की वापसी की पुष्टि की थी। “ये सिर्फ एक शो नहीं, एक विरासत है,” – स्मृति…

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मुग़ल-ए-आज़म रेट्रो रिव्यू: बॉलीवुड का शाही इश्क़, जो आज भी राज करता है

भारत में जब देश खुद को आज़ाद कह रहा था, तभी एक फिल्म आई जिसने बता दिया कि प्यार कभी ग़ुलाम नहीं होता — वो या तो जीतता है, या फिर इतिहास बन जाता है। हम बात कर रहे हैं K. Asif की कालजयी कृति ‘मुग़ल-ए-आज़म’ की। जब ‘सलीम’ और ‘अनारकली’ ने प्यार को क़ैद से आज़ाद किया दिलीप कुमार और मधुबाला की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री देखने के बाद लोग बिजली के झटकों की जगह ‘प्यारी फुहारें’ महसूस करने लगे थे।अनारकली की आँखों में बगावत, सलीम के लहजे में मोहब्बत —…

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Coldplay में बजा प्यार का ट्यून, Tech कंपनी में छिड़ गया टर्मिनेशन का धुन

जब Coldplay का कॉन्सर्ट चल रहा हो और प्यार स्क्रीन पर आ जाए, तो आमतौर पर भीड़ तालियाँ बजाती है।लेकिन अगर वो प्यार एक टेक कंपनी के सीईओ और उनकी कलीग का हो — और कैमरा उसे जूम करके पकड़ ले — तो तालियाँ नहीं, HR Policy खुल जाती है। एस्ट्रोनॉमर कंपनी के दो कर्मचारी — जिनमें से एक खुद सीईओ एंडी बायरन थे — गले मिलते हुए कैमरे पर पकड़े गए।जैसे ही उनकी झलक कॉन्सर्ट की बड़ी स्क्रीन पर आई, उन्होंने Mission Impossible स्टाइल में चेहरा छुपाया — लेकिन…

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