हंसते-हंसते अगर कोई फिल्म आपका दिल तोड़ दे, तो समझ लीजिए वो सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं, सच्चाई है। गरीबी, धोखा और सपनों का क्रैश—ये कहानी 1951 की है, लेकिन दर्द 2026 का लगता है। और सवाल ये है… क्या हम आज भी उसी Albela समाज में जी रहे हैं? कहानी नहीं, सिस्टम का आईना है Albela Albela सिर्फ एक म्यूजिकल कॉमेडी नहीं थी… ये उस दौर का “सॉफ्ट रिवोल्यूशन” थी, जो हंसते-हंसते समाज की नसें काटती है। भगवान दादा का किरदार प्यारेलाल कोई हीरो नहीं था, वो उस आम आदमी का…
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Suraj (1966) Movie Review: राजेंद्र कुमार की आखिरी सुपरहिट
टी. प्रकाश राव के निर्देशन में बनी फिल्म ‘सूरज’, राजसी प्रेम कहानी को उस दौर की मसालेदार बॉलीवुड स्टाइल में परोसती है। यहाँ नायक सूरज सिंह (राजेंद्र कुमार) सिर्फ दिल चुराता नहीं, बल्कि राजकुमारी भी चुरा लेता है – वो भी घोड़े पर बैठकर, जैसे हॉलीवुड और राजश्री की फिल्मों में होता है। कथानक: कौन राजकुमार, कौन डाकू? राजकुमार प्रताप की गद्दी पर बैठा है वो, जो असल में संग्राम सिंह का बेटा है! और असली राजकुमारी को डाकू सूरज उठा ले जाता है — बस यहीं से शुरू होती…
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