
उत्तर प्रदेश की राजनीति फिर से गर्म है। नहीं-नहीं, इस बार न बिजली बिल का मुद्दा है, न किसान आंदोलन। मुद्दा है — “ब्राह्मण वोट बैंक”, जो 2027 के चुनावी रण में ‘शंखध्वनि’ कर चुका है।
BJP की ब्राह्मण-बुद्धि: अध्यक्ष पद पर बौद्धिक ‘जुगाड़’
बीजेपी ने योग-मुद्रा से निकल कर अब ‘ब्राह्मण मुद्रा’ अपना ली है। पार्टी का मास्टरस्ट्रोक?
“अध्यक्ष ब्राह्मण बनाओ, नाराज़गी भगाओ।”
डॉ. दिनेश शर्मा जैसे शांत और सज्जन नेता से लेकर मनोज तिवारी जैसे ‘ढोल नगाड़े’ वाले चेहरे तक सबकी कुंडली खोली जा रही है। ब्राह्मण समाज को लग रहा है जैसे अब ‘ग्रह-नक्षत्र’ फिर से उनके फेवर में आ गए हैं।
सपा का ‘PDA’ से ‘ब्राम्हण DA’ की ओर झुकाव
अखिलेश यादव को भी अब ब्राह्मणों की वात्सल्य वाणी लुभाने लगी है। PDA (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) के बाद अब
“PDB” यानी पंडित-दलित-बहुजन का नया मिश्रण तैयार हो रहा है।
सपा ने माता प्रसाद पांडे को नेता प्रतिपक्ष बनाकर बता दिया कि अब ‘अगड़ी जातियों’ के लिए भी दरवाज़ा खुला है – बस घंटी बजाकर प्रवेश करें।
कौन बनेगा अध्यक्ष: ज्योतिष भी कन्फ्यूज
सट्टा बाजार नहीं, पर राजनीति बाजार में कुछ नामों की चर्चा ज़ोरों पर है:
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डॉ. दिनेश शर्मा – ब्राह्मणों के ‘कूल बाबा’
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हरीश द्विवेदी – युवाओं के नेता, योगी जी के फेवरेट
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मनोज तिवारी – वोट भी लाएं, गाना भी गाएं

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रमापति राम त्रिपाठी – पुराने खिलाड़ी, नए समीकरण
क्यों जरूरी है ब्राह्मण वोट?
क्योंकि ये 12% हैं, और राजनीति में 12% मास्टरमाइंड बराबर होते हैं 50% हवा बनाने के! भाजपा जानती है कि “कुलदीप नैयर” वाला संतुलन अब केवल टीवी डिबेट में नहीं, मैदान में चाहिए।
2027 की सियासी महायुद्ध: ब्राह्मण बनाम सब कुछ!
BJP कह रही है:
“हम ही असली ब्राह्मण-हितैषी हैं।”
SP कह रही है:
“हमने भी अब गीता पढ़ ली है!”
और ब्राह्मण समाज?
“अब देखेंगे कौन कितने पानी में है!”
आख़िर में सवाल सिर्फ एक: किस पार्टी की आहुति ब्राह्मण कुंड में स्वाहा होगी?
राजनीति के इस नए यज्ञ में सभी दल अपने राजनीतिक पुरोहितों के साथ तैयार हैं, मंत्रोच्चार शुरू हो चुका है —
“जय ब्राह्मण देवाय नमः!”
“सुनामी अलर्ट! अमेरिका में रह रहे भारतीय रहें सावधान”
