
अयोध्या मंगलवार को एक ऐतिहासिक दृश्य की गवाह बनेगी। विवाह पंचमी के शुभ अवसर पर राम मंदिर में शिखर ध्वजारोहण का आयोजन किया गया है। दोपहर 12 बजे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंदिर के शिखर पर भगवा ध्वज फहरा चुके — एक ऐसा पल जिसका इंतज़ार करोड़ों भक्त कर रहे थे।
इस आयोजन को लेकर अयोध्या में माहौल उत्सव जैसा है। राम–जानकी विवाहोत्सव के बीच श्रद्धा और शोर—दोनों चरम पर हैं।
अखिलेश यादव का संकेत—“राम मंदिर क्यों नहीं गए?”
अब आते हैं सबसे दिलचस्प हिस्से पर… ध्वजारोहण से पहले ही समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने एक रहस्यमयी-सा ट्वीट कर दिया, जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया।
उन्होंने लिखा— “पूर्णता ही पूर्णता की ओर ले जाती है… इटावा में ‘श्री केदारेश्वर महादेव मंदिर’ के पूर्ण होने पर अन्य मंदिरों के दर्शन का संकल्प भी पूर्ण करेंगे।”
सीधे शब्दों में:
“पहले अपना मंदिर पूरा कर लूँ, फिर अयोध्या आऊँगा।”
इशारों में कहा, मगर संदेश साफ़— वो अभी राम मंदिर इसलिए नहीं गए क्योंकि उनका अपना आध्यात्मिक प्रोजेक्ट अधूरा है।
आस्था पर अखिलेश की फिलॉसफी
उन्होंने आगे लिखा—आस्था आपको सकारात्मकता देती है। दर्शन के लिए ईश्वरीय इच्छा ही मार्ग बनाती है। यानी उनका मानना है कि मंदिर तभी जाना चाहिए जब… “ईश्वर बुलाएँ।”

और फिलहाल ईश्वर शायद उन्हें इटावा रूट का टिकट दे रहे हैं।
पहले भी कह चुके हैं — “मैं निर्माण पूरा होने के बाद जाऊँगा”
अखिलेश इससे पहले एक इंटरव्यू में भी यही दोहरा चुके हैं कि वे राम मंदिर पूरा बनने के बाद ही दर्शन करने जाएंगे। साथ ही उन्होंने अपने इटावा स्थित श्री केदारेश्वर महादेव मंदिर के निर्माण का जिक्र किया था, जो अब लगभग पूरा होने वाला है।
उनका प्लान भी काफ़ी सीधा है इटावा का मंदिर दर्शन फिर सीधे अयोध्या दर्शन।
राजनीति में इसे कोमल भाषा में “टाइमिंग” कहते हैं।
“धरम पाजी के नाम सबकी आंखें नम—देश भर से उमड़ा प्यार!”
