पंजाब विधानसभा सत्र आज से शुरू, झोटा हत्याकांड पर भगवंत मान से इस्तीफे की मांग करेगा विपक्ष; नशे और अवैध खनन पर भी घेरने की तैयारी

चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा का सत्र 22 अक्टूबर से शुरू हो रहा है, जिसके हंगामेदार रहने के आसार हैं। विपक्ष ने मानसा में परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के इस्तीफे की मांग उठाने की तैयारी की है। नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने साफ किया है कि वह इस मामले में झोटा के परिवार की मांग को सदन में उठाएंगे। इसके अलावा नशे की समस्या, भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों और होशियारपुर में अवैध खनन को लेकर भी सरकार को घेरने की रणनीति बनाई गई है। दूसरी ओर, सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने विपक्ष के सवालों का जवाब देने के लिए आंकड़ों और विभागीय जानकारी के साथ अपनी तैयारी की है।

27 अक्टूबर तक चलेगा विधानसभा सत्र

पंजाब विधानसभा का सत्र 22 से 27 अक्टूबर तक चलेगा। विपक्ष की रणनीति को देखते हुए आम आदमी पार्टी ने बुधवार को ही अपने विधायकों को नशे के खिलाफ अभियान, गैंगस्टरों पर कार्रवाई और राज्य में लगातार हो रही नशीले पदार्थों की बरामदगी से जुड़े आंकड़े उपलब्ध कराए। दो मंत्रियों को देश के अलग-अलग राज्यों में नशे से संबंधित आंकड़ों की जानकारी दी गई है।

इसके साथ ही सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जुड़े कथित झूठे मामलों का विवरण भी तेजतर्रार मंत्रियों को सौंपा गया है। उन्हें विपक्ष के सवालों का आक्रामक ढंग से जवाब देने की तैयारी करने को कहा गया है।

पहले दिन से ही हंगामे के आसार

सत्र का पहला दिन गैर-सरकारी कामकाज के लिए निर्धारित है, लेकिन इसके बावजूद सदन में राजनीतिक गर्मी देखने को मिल सकती है। संभावना है कि विपक्ष प्रश्नकाल और शून्यकाल के दौरान ही सरकार के खिलाफ अपने मुद्दे उठाना शुरू कर देगा। सत्तापक्ष ने भी इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए जवाब देने की तैयारी की है।

पहले दिन की कार्यवाही में दिवंगत व्यक्तियों को श्रद्धांजलि देने के साथ तीन ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पेश किए जाने हैं। इसके अलावा विभिन्न विभागों की वार्षिक रिपोर्टें भी सदन के पटल पर रखी जाएंगी।

मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण के खिलाफ प्रस्ताव की तैयारी

विधानसभा सत्र के पहले दिन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किए जाने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, एक वरिष्ठ विधायक यह प्रस्ताव लाएंगे। इसमें मांग की जाएगी कि पंजाब विधानसभा सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करे कि आगामी विधानसभा चुनाव उन मतदाता सूचियों के आधार पर कराए जाएं, जो एसआईआर शुरू होने से पहले मौजूद थीं।

प्रस्ताव में दावा किया गया है कि एसआईआर के नाम पर राज्य में लाखों मतदाताओं के नाम सूची से काट दिए गए हैं, जिसका मतदान पर असर पड़ सकता है। इसी आधार पर पुनरीक्षण से पहले की मतदाता सूची के इस्तेमाल की मांग उठाई जाएगी।

मतदाता सूची के मुद्दे पर सत्तापक्ष का समर्थन मिलने की उम्मीद

यह प्रस्ताव विपक्ष से जुड़े एक विधायक की ओर से लाए जाने की तैयारी है, लेकिन इसका विषय ऐसा है जिस पर सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी का समर्थन भी मिलने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में विधानसभा में इस प्रस्ताव पर सभी दलों के रुख पर नजर रहेगी।

झोटा हत्याकांड, नशे की समस्या, भ्रष्टाचार, अवैध खनन और मतदाता सूची के पुनरीक्षण जैसे मुद्दों के कारण इस सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है।

Related posts