श्रीनगर: महंगे कपड़ों की ड्राई क्लीनिंग में लापरवाही करना एक कंपनी को भारी पड़ गया। जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में जिला उपभोक्ता आयोग ने पश्मीना शॉल और फेरन खराब करने के मामले में ड्राई क्लीनिंग कंपनी पर 59,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। आयोग ने कंपनी को खराब हुए कपड़ों की कीमत, मानसिक परेशानी के मुआवजे और मुकदमे के खर्च के रूप में यह राशि महिला ग्राहक को देने का आदेश दिया है।
18 कपड़े ड्राई क्लीनिंग के लिए दिए थे
मामला जमीला राशिद का है, जिन्होंने 26 मार्च 2024 को ‘यूक्लीन सेलेक्ट श्रीनगर’ को ड्राई क्लीनिंग के लिए कुल 18 कपड़े सौंपे थे। इनमें उनका कीमती पश्मीना शॉल और फेरन भी शामिल था।
जब ड्राई क्लीनिंग के बाद कपड़े वापस मिले, तो पश्मीना शॉल और फेरन खराब हो चुके थे। इससे महिला को आर्थिक नुकसान हुआ। इसके बाद उन्होंने कंपनी प्रबंधन से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई।
पहले मुआवजे का भरोसा, फिर जवाब देना किया बंद
कपड़े खराब होने की शिकायत पर कंपनी ने महिला को भरोसा दिया था कि या तो कपड़े बदलकर दिए जाएंगे या उनकी पूरी कीमत लौटाई जाएगी। हालांकि, बाद में कंपनी ने समस्या का समाधान नहीं किया।
महिला ने कई बार फोन और व्हाट्सएप संदेशों के जरिए कंपनी से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। आखिरकार उन्होंने न्याय के लिए जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
व्हाट्सएप चैट से सामने आई कंपनी की गलती
श्रीनगर जिला उपभोक्ता आयोग ने 19 सितंबर 2026 को मामले में आदेश सुनाया। सुनवाई के दौरान व्हाट्सएप पर हुई बातचीत को अहम साक्ष्य माना गया। आयोग के अनुसार, बातचीत में कंपनी ने कर्मचारियों की गलती से कपड़ों को नुकसान पहुंचने की बात स्वीकार की थी। कपड़ों की मरम्मत करने की कोशिश भी सफल नहीं हुई थी।
आयोग ने कंपनी की सेवा में कमी मानते हुए महिला को आर्थिक नुकसान और मानसिक परेशानी के लिए मुआवजा देने का निर्देश दिया।
45 दिनों के भीतर देना होगा 59 हजार रुपये
जिला उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को कुल 59,000 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। इसमें अलग-अलग मदों में राशि तय की गई है।
- 47,000 रुपये: खराब हुए कपड़ों की कीमत
- 10,000 रुपये: मानसिक परेशानी के मुआवजे के रूप में
- 2,000 रुपये: मुकदमे का खर्च
आयोग ने निर्देश दिया है कि आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के 45 दिनों के भीतर कंपनी यह पूरी राशि महिला को दे। यह मामला उपभोक्ता अधिकारों और सेवा में लापरवाही के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का उदाहरण है।
