मुंबई में ही क्यों होगी जयशंकर और रुबियो की बैठक? राहुल गांधी के तंज पर विदेश मंत्रालय ने दिया जवाब

नई दिल्ली: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मुलाकात 20 अक्टूबर को मुंबई में होगी। बैठक के लिए दिल्ली के बजाय मुंबई को चुने जाने पर उठ रहे सवालों के बीच विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि विदेशी मेहमानों की मेजबानी राजधानी से बाहर करना कोई नई परंपरा नहीं है। मंत्रालय का यह बयान कांग्रेस नेता राहुल गांधी की टिप्पणी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने रुबियो की यात्रा को लेकर केंद्र सरकार पर तंज कसा था।

19 अक्टूबर को यूएई के विदेश मंत्री से मिलेंगे जयशंकर

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पुष्टि की कि एस. जयशंकर 19 और 20 अक्टूबर को मुंबई में विदेशी प्रतिनिधियों की मेजबानी करेंगे। 19 अक्टूबर को वह संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात करेंगे।

इसके अगले दिन यानी 20 अक्टूबर को जयशंकर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ बातचीत करेंगे। रुबियो भारत की यात्रा के दौरान अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ से जुड़े समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भी शामिल होंगे।

विदेश मंत्रालय ने बताया, दिल्ली से बाहर बैठकें नई बात नहीं

बैठक मुंबई में आयोजित किए जाने के सवाल पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पिछले एक दशक या उससे अधिक समय से भारत दिल्ली के बाहर भी विदेशी प्रतिनिधियों की मेजबानी करता रहा है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वडोदरा में स्पेन के प्रधानमंत्री, अहमदाबाद में जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्त्ज और वाराणसी में मॉरीशस के प्रधानमंत्री की मेजबानी की थी। इसके अलावा विदेश मंत्री गोवा में भी विदेशी विदेश मंत्रियों की बैठक आयोजित कर चुके हैं।

मंत्रालय के मुताबिक, विदेशी नेताओं के कार्यक्रम दिल्ली तक सीमित नहीं रहते और मुंबई में होने वाली यह बैठक भी इसी व्यवस्था के तहत आयोजित की जा रही है।

राहुल गांधी ने रुबियो की यात्रा को लेकर कसा था तंज

अमेरिकी विदेश मंत्री की मुंबई यात्रा को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए थे। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि रुबियो ने मुंबई में भारतीय अधिकारियों के साथ बैठक के लिए बुलाया है। उन्होंने विदेश मंत्रालय की भूमिका पर सवाल उठाते हुए तंज किया कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मामले को समझना चाहते हैं, तो वह उन्हें समझाने के लिए तैयार हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता जयराम रमेश ने भी सवाल उठाया था कि भारत के विदेश मंत्री के कार्यक्रम की जानकारी अमेरिकी राजदूत की ओर से क्यों साझा की गई। इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी के बीच विदेश मंत्रालय ने मुंबई में बैठक आयोजित करने के फैसले का बचाव किया है।

रुबियो की यात्रा के दौरान ऊर्जा क्षेत्र पर भी नजर

मार्को रुबियो की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब अमेरिका और भारत के बीच कूटनीतिक तथा आर्थिक मुद्दे अहम बने हुए हैं। यात्रा के दौरान रुबियो के मुंबई और जामनगर जाने का कार्यक्रम बताया गया है।

गुजरात के जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज की बड़ी तेल रिफाइनरी स्थित है। भारत के ऊर्जा क्षेत्र में जामनगर रिफाइनरी की महत्वपूर्ण भूमिका है और यहां विभिन्न देशों से आने वाले कच्चे तेल का प्रसंस्करण किया जाता है।

अमेरिका की ऊर्जा नीतियों, रूस से तेल खरीद और वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर जारी चर्चाओं के बीच रुबियो की यात्रा पर भी नजर रहेगी। हालांकि, मुंबई में जयशंकर के साथ होने वाली बैठक के एजेंडे के सभी बिंदुओं की आधिकारिक जानकारी इस बयान में नहीं दी गई है।

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