- उन्नाव । देश और प्रदेश में शिक्षा का स्तर लगातार बढ़ने के बावजूद रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध न होने से बड़ी संख्या में नौजवानों में चिंता बढ़ती जा रही है। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी अनेक युवा नौकरी की तलाश में एक स्थान से दूसरे स्थान तक भटक रहे हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों गुजारने के बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया लंबी होने तथा विभिन्न विभागों में रिक्त पदों पर भर्ती न होने से युवाओं में निराशा का माहौल दिखाई दे रहा है।
- नौजवानों का कहना है कि सरकारी विभागों में बड़ी संख्या में पद रिक्त पड़े हैं। इन पदों पर समयबद्ध तरीके से भर्ती होने से जहां सरकारी विभागों के कामकाज को गति मिलेगी, वहीं शिक्षित बेरोजगार युवाओं को रोजगार का अवसर भी प्राप्त होगा। युवाओं ने सरकार से मांग की है कि सभी विभागों में रिक्त पदों का पारदर्शी तरीके से आकलन कर जल्द से जल्द भर्ती कैलेंडर जारी किया जाए और चयन प्रक्रिया को निर्धारित समयसीमा में पूरा कराया जाए।
- युवाओं का कहना है कि रोजगार केवल व्यक्ति की आर्थिक स्थिति से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध परिवार और समाज की खुशहाली से भी है। जब कोई शिक्षित युवा लंबे समय तक बेरोजगार रहता है तो उसके सामने आर्थिक कठिनाइयों के साथ-साथ भविष्य को लेकर अनिश्चितता भी बढ़ती है। नौकरी की तलाश में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अनेक युवाओं को कोचिंग, आवागमन, पुस्तकों और अन्य आवश्यक संसाधनों पर लगातार खर्च करना पड़ता है।नौजवानों ने सरकार से मांग की है कि विभिन्न विभागों में रिक्त पदों की जानकारी सार्वजनिक की जाए तथा प्रत्येक विभाग के लिए नियमित भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि भर्ती परीक्षाओं की तिथियां समय से घोषित हों, परीक्षाएं निर्धारित समय पर आयोजित हों और परिणाम तथा नियुक्ति प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब न होयुवाओं ने यह भी कहा कि सरकारी नौकरियों के साथ-साथ निजी क्षेत्र, लघु उद्योग, स्वरोजगार और कौशल विकास के माध्यम से भी रोजगार के अवसर बढ़ाए जाने की आवश्यकता है। छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योग एवं रोजगार के नए केंद्र विकसित किए जाएं, ताकि युवाओं को रोजगार की तलाश में बड़े शहरों की ओर पलायन न करना पड़े। शिक्षित युवाओं का कहना है कि आज बड़ी संख्या में युवा स्नातक, परास्नातक, तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था और रोजगार बाजार के बीच बेहतर तालमेल बनाना जरूरी है।
- युवाओं को उनकी योग्यता के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण और रोजगारपरक शिक्षा उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे नौकरी के साथ-साथ अपना व्यवसाय शुरू करने में भी सक्षम बन सकें।

- बेरोजगारी की समस्या का समाधान केवल सरकारी नौकरियों की संख्या बढ़ाने से नहीं होगा, बल्कि इसके लिए निजी निवेश, उद्योगों की स्थापना, स्थानीय स्तर पर कारोबार को प्रोत्साहन और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने की भी आवश्यकता है। ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में छोटे उद्योगों को प्रोत्साहन मिलने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अनेक अवसर पैदा हो सकते हैं।
- बांगरमऊ क्षेत्र के युवाओं का कहना है कि सरकार यदि सभी विभागों में रिक्त पदों को चिह्नित कर समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया शुरू करे तो बड़ी संख्या में शिक्षित बेरोजगार युवाओं को राहत मिल सकती है। युवाओं ने सरकार से मांग की है कि भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध बनाया जाए तथा रोजगार से संबंधित योजनाओं की जानकारी युवाओं तक प्रभावी ढंग से पहुंचाई जाए। युवाओं का कहना है कि देश का युवा वर्ग उसकी सबसे बड़ी ताकत है। यदि उसे शिक्षा के साथ रोजगार, कौशल और आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलें तो वह परिवार, समाज और देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसलिए बेरोजगारी की समस्या को गंभीरता से लेते हुए सरकार को दीर्घकालिक और प्रभावी रोजगार नीति पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
- नौजवानों की एक ही मांग है कि सरकारी विभागों में रिक्त पड़े पदों को शीघ्र भरा जाए, भर्ती प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी समाप्त की जाए और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा किए जाएं। यही कदम शिक्षित युवाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाने और उनके भीतर बढ़ती चिंता को कम करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
