डॉक्टरों-अस्पतालों के लिए NMC का बड़ा आदेश! AI से फर्जी मरीज रिव्यू और ‘100% सक्सेस’ जैसे दावे पर रोक, रैंकिंग खरीदना भी बंद

नई दिल्ली: राष्ट्रीय मेडिकल कमीशन (NMC) ने डॉक्टरों और अस्पतालों के लिए नैतिक विज्ञापन से जुड़े नए नियम जारी कर दिए हैं। ये नियम तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं। अब डॉक्टर और अस्पताल मरीजों के टेस्टिमोनियल, क्लिनिकल रिजल्ट या प्रचार सामग्री तैयार करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। सर्च इंजन या ऐप पर अपनी रैंकिंग बढ़ाने के लिए पैसे खर्च करने पर भी रोक लगा दी गई है।

AI से बनाए फर्जी रिव्यू और एंडोर्समेंट पर पाबंदी

एनएमसी के नए नियमों के मुताबिक, पंजीकृत डॉक्टर और अस्पताल अपनी सेवाओं के प्रचार, मरीजों को आकर्षित करने या ऐसी चिकित्सकीय जानकारी प्रसारित करने के लिए AI से तैयार सामग्री का इस्तेमाल नहीं कर सकते, जिसकी पुष्टि करना संभव न हो।

AI की मदद से नकली मरीज टेस्टिमोनियल, आवाज, क्लिनिकल परिणाम या फर्जी समर्थन तैयार करना पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसके अलावा चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता या उनके स्वरूप को गलत तरीके से पेश करना भी नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।

‘बेस्ट’ और ‘100% सक्सेस’ जैसे दावों पर भी रोक

डॉक्टर और अस्पताल अपनी सेवाओं के प्रचार में ‘बेस्ट’, ‘नंबर वन’, ‘मोस्ट ट्रस्टेड’, ‘गारंटीड क्योर’ या ‘100% सक्सेस’ जैसे दावे नहीं कर सकेंगे। मरीजों को आकर्षित करने के लिए सर्च रैंकिंग बढ़ाने के बदले भुगतान करना भी प्रतिबंधित रहेगा।

इसके अलावा इंफ्लुएंसर, विज्ञापन एजेंसी या ऑनलाइन मंच के जरिए मरीज लाने के बदले पैसे देने वाले समझौते भी नहीं किए जा सकेंगे।

डिस्काउंट, कूपन और मरीजों की तस्वीरों पर भी सख्ती

नए नियमों में सीमित अवधि के डिस्काउंट, कूपन, उपहार पैकेज या रेफरल लाभ देने पर भी नियंत्रण लगाया गया है। ऐसे किसी लाभ की अनुमति नहीं होगी जिससे अनावश्यक परामर्श या उपचार कराने के लिए मरीजों को प्रेरित किए जाने का खतरा हो।

मरीजों की तस्वीरों का इस्तेमाल भी उनकी उचित सहमति और जरूरी सुरक्षा उपायों के बिना नहीं किया जा सकेगा। मरीजों के टेस्टिमोनियल, इलाज से पहले और बाद की तस्वीरें तथा उपचार की सफलता से जुड़े ऐसे दावे भी प्रतिबंधित होंगे, जो मरीजों में गलत उम्मीद पैदा कर सकते हैं या उन्हें गुमराह कर सकते हैं।

सोशल मीडिया पर सिर्फ तथ्यात्मक स्वास्थ्य जानकारी

एनएमसी ने सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर भी सीमाएं तय की हैं। डॉक्टर सोशल मीडिया पर तथ्यात्मक और गैर-प्रचारात्मक स्वास्थ्य शिक्षा से जुड़ी जानकारी साझा कर सकेंगे। अस्पतालों को भी केवल वस्तुनिष्ठ जानकारी साझा करने की अनुमति होगी।

नियम तोड़े तो पहली चेतावनी से लेकर रजिस्टर से नाम हटाने तक कार्रवाई

नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से होगी। पहली बार उल्लंघन करने पर चेतावनी के साथ अनिवार्य नैतिकता प्रशिक्षण कराया जाएगा। दूसरी बार उल्लंघन पर निंदा और आर्थिक जुर्माना लगाया जा सकता है।

तीसरी बार उल्लंघन होने पर तीन से छह महीने तक निलंबन का प्रावधान है। गंभीर मामलों में छह से 12 महीने तक निलंबन किया जा सकता है।

लगातार नियमों का उल्लंघन करने पर मेडिकल रजिस्टर से एक से तीन साल तक नाम हटाया जा सकता है।

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