देहरादून: उत्तराखंड के डॉक्टर विहीन और दूरदराज के अस्पतालों में इलाज के लिए भटक रहे मरीजों को राहत मिल सकती है। राज्य सरकार DPharma और BPharma की योग्यता रखने वाले फार्मासिस्टों को कुछ सामान्य बीमारियों के लिए सीमित दवाएं लिखने का अधिकार देने पर विचार कर रही है। इसके लिए स्वास्थ्य महानिदेशालय की ओर से प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
प्रस्ताव के तहत खांसी, जुकाम, बुखार, मूत्र मार्ग संक्रमण यानी UTI और सांस से जुड़ी कुछ सामान्य बीमारियों के इलाज में फार्मासिस्टों को सीमित दवाएं लिखने की अनुमति देने पर विचार है। हालांकि, व्यवस्था लागू करने से पहले दूसरे राज्यों में लागू मॉडल का अध्ययन किया जाएगा। इसके लिए एक समिति गठित करने की तैयारी भी है।
सरकार का मानना है कि डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे दुर्गम इलाकों में इस व्यवस्था से सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं वाले मरीजों को शुरुआती उपचार स्थानीय स्तर पर मिल सकेगा।
डॉक्टरों की कमी वाले अस्पतालों में मिलेगी राहत
उत्तराखंड के कई दूरदराज क्षेत्रों में अस्पताल मौजूद हैं, लेकिन डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को इलाज के लिए दूसरे स्थानों का रुख करना पड़ता है। ऐसे में यदि फार्मासिस्टों को सीमित दवाएं लिखने की अनुमति मिलती है तो सामान्य बीमारियों के मरीजों को स्थानीय स्तर पर शुरुआती उपचार मिल सकता है।
फार्मासिस्ट लंबे समय से इस तरह की व्यवस्था की मांग करते रहे हैं। हाल में स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के साथ हुई बैठक में भी यह मुद्दा उठाया गया था।
असम और हिमाचल के मॉडल का होगा अध्ययन
स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक, फार्मासिस्टों को सीमित दवा लिखने का अधिकार देने के प्रस्ताव पर काम चल रहा है। स्वास्थ्य महानिदेशक को इस संबंध में प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके बाद प्रस्तावित समिति असम और हिमाचल प्रदेश समेत दूसरे राज्यों में लागू ऐसी व्यवस्थाओं का अध्ययन करेगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर उत्तराखंड में इस व्यवस्था को लागू करने को लेकर आगे फैसला लिया जाएगा।
दून अस्पताल में डॉक्टरों की हड़ताल का असर
इधर, स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर MBBS इंटर्न और PG डॉक्टरों की हड़ताल का असर दून अस्पताल की सेवाओं पर भी दिखाई दे रहा है। इलेक्टिव सर्जरी के लिए मरीजों की भर्ती कम होने से ऑपरेशन की संख्या में गिरावट आई है।
बुधवार को ऑर्थोपेडिक्स विभाग में दो और सर्जरी विभाग में सिर्फ एक इलेक्टिव ऑपरेशन हुआ। सामान्य दिनों में दोनों विभागों में करीब पांच-पांच इलेक्टिव ऑपरेशन किए जाते हैं।
हालांकि, इमरजेंसी OT, कैथलैब, नेत्र तथा स्त्री एवं प्रसूति विभाग की सर्जरी पर हड़ताल का असर नहीं पड़ा है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार जरूरत वाले मरीजों को भर्ती करके उनके ऑपरेशन किए जा रहे हैं। ICU और इमरजेंसी में PG डॉक्टर तथा इंटर्न अपनी ड्यूटी कर रहे हैं।
