पंजाब सरकार का बड़ा फैसला! सरकारी अस्पतालों में शुरू होंगी MRI-CT Scan जैसी आधुनिक जांच सुविधाएं, निजी लैब पर निर्भरता होगी कम

चंडीगढ़: पंजाब में सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले लाखों मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार ने सभी 23 जिला अस्पतालों और कुछ उपमंडल अस्पतालों में एमआरआई, सीटी स्कैन समेत आधुनिक डायग्नोस्टिक जांच सुविधाएं शुरू करने का फैसला लिया है। इस पहल के बाद मरीजों को महंगे निजी जांच केंद्रों के चक्कर कम लगाने पड़ेंगे और अपने जिले में ही समय पर जांच की सुविधा मिल सकेगी।

निजी लैब पर निर्भरता होगी कम

फिलहाल राज्य के अधिकांश सरकारी अस्पतालों में एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी उन्नत जांच सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में मरीजों को निजी संस्थानों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे इलाज का खर्च बढ़ने के साथ-साथ जांच में भी देरी होती है। कई मरीज आर्थिक कारणों से समय पर जांच नहीं करा पाते, जिससे बीमारी गंभीर रूप ले लेती है।

निजी संस्थाएं लगाएंगी मशीनें, रियायती दरों पर होगी जांच

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार नई व्यवस्था के तहत निजी संस्थाएं सरकारी अस्पतालों में आधुनिक जांच उपकरण स्थापित करेंगी और उनका संचालन भी करेंगी। मरीजों को निर्धारित रियायती दरों पर जांच की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे सरकार पर भारी पूंजीगत खर्च का बोझ भी नहीं पड़ेगा और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।

जिला अस्पतालों में मशीनें लगाने का काम शुरू

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि जिला अस्पतालों में मशीनें लगाने का काम शुरू हो चुका है। कुछ उपमंडल अस्पतालों को भी इस योजना में शामिल किया गया है। राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के पास स्थित अस्पतालों में यह सुविधा उपलब्ध होने से सड़क दुर्घटनाओं में घायल मरीजों की तुरंत जांच कर इलाज शुरू करना आसान होगा।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को देखते हुए नई व्यवस्था

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि राज्य में रेडियोलॉजी विशेषज्ञों की कमी को देखते हुए यह मॉडल अपनाया जा रहा है। सरकारी अस्पतालों में लंबे समय से विशेषज्ञ चिकित्सकों के कई पद रिक्त हैं। ऐसे में निजी भागीदारी के माध्यम से मरीजों तक आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की योजना बनाई गई है।

ग्रामीण मरीजों को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ

सरकार का मानना है कि जिला स्तर पर आधुनिक जांच सुविधाएं शुरू होने से बड़े अस्पतालों पर दबाव कम होगा। मरीजों का समय और खर्च दोनों बचेंगे, जबकि गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान होने से इलाज भी जल्दी शुरू किया जा सकेगा। इससे ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों के मरीजों को विशेष राहत मिलेगी, जिन्हें अब केवल जांच के लिए बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।

 

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