NDA की ‘मंगल मिलन’ बैठक शुरू, पहली बार शामिल हुए NCPI सांसद; परीक्षा कानून समेत कई मुद्दों पर बनेगी रणनीति

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के बीच मंगलवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) संसदीय दल की साप्ताहिक ‘मंगल मिलन’ बैठक संसद पुस्तकालय भवन स्थित जी.एम.सी. बालयोगी ऑडिटोरियम में शुरू हो गई। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री और गठबंधन के सांसद मौजूद हैं। इस बार की बैठक की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि नवगठित नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) की सांसद पहली बार इस रणनीतिक बैठक में शामिल हुईं।

प्रधानमंत्री समेत कई वरिष्ठ नेता बैठक में मौजूद

बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी और राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। गठबंधन के विभिन्न दलों के सांसद भी बैठक में मौजूद रहे।

पहली बार शामिल हुईं NCPI की सांसद

तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर बनी नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) की सांसद काकोली घोष, शताब्दी रॉय और सायनी घोष ने पहली बार NDA संसदीय दल की ‘मंगल मिलन’ बैठक में हिस्सा लिया। इसे गठबंधन के विस्तार और संसदीय समन्वय के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

परीक्षा कानून पर होगी रणनीति तय

यह बैठक लोकसभा में ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पेश होने के एक दिन बाद आयोजित हो रही है। सरकार इस विधेयक के जरिए पेपर लीक और परीक्षा माफिया पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान करना चाहती है। प्रस्तावित कानून में 10 वर्ष तक की सजा, 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना, संपत्ति जब्ती और मामलों के त्वरित निस्तारण जैसे प्रावधान शामिल हैं।

बैठक में इस विधेयक पर संसद के भीतर सरकार की रणनीति, विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की तैयारी और गठबंधन के सभी सहयोगी दलों के बीच बेहतर समन्वय को लेकर चर्चा होने की संभावना है।

क्या है ‘मंगल मिलन’ बैठक?

‘मंगल मिलन’ NDA संसदीय दल की साप्ताहिक रणनीतिक बैठक है, जिसमें भाजपा के साथ जेडीयू, टीडीपी, शिवसेना, एलजेपी, अपना दल और अन्य सहयोगी दलों के सांसद शामिल होते हैं। इस बैठक में संसद की कार्यवाही, प्रमुख विधेयकों, राजनीतिक मुद्दों और गठबंधन की साझा रणनीति पर चर्चा की जाती है, ताकि सदन के भीतर सभी दलों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित किया जा सके।

 

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