नई दिल्ली: लाल सागर में सऊदी अरब के तेल टैंकरों पर हुए हमले के बाद पाकिस्तान की प्रतिक्रिया को लेकर नए सवाल उठने लगे हैं। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बातचीत की और एकजुटता का भरोसा जताया। हालांकि, घटनाक्रम के बाद पाकिस्तान की ओर से किसी प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई की घोषणा नहीं की गई, जिससे दोनों देशों के रक्षा सहयोग को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
हमले के बाद सऊदी नेतृत्व से की बातचीत
लाल सागर में यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमले के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से टेलीफोन पर बातचीत की। उन्होंने हमले की निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया और क्षेत्रीय शांति एवं समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा करार दिया।
रक्षा समझौते पर उठे सवाल
रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग का एक समझौता है, जिसके तहत सुरक्षा संबंधी मामलों में परस्पर सहयोग की बात कही गई है। ऐसे में हमले के बाद पाकिस्तान की ओर से केवल कूटनीतिक प्रतिक्रिया आने के कारण उसके रुख पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
ईरान से संबंध भी बने चर्चा का विषय
विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान के सामने संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी है। हाल ही में ईरान के गृह मंत्री ने पाकिस्तान का दौरा किया था, जिसके दौरान दोनों देशों ने आपसी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। चूंकि हूती विद्रोहियों को ईरान समर्थित माना जाता है, इसलिए पाकिस्तान के लिए क्षेत्रीय कूटनीतिक समीकरण भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
विदेश मंत्रालय ने दी चेतावनी
हमले के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि लाल सागर में पाकिस्तानी झंडे वाले जहाजों या पाकिस्तान के समुद्री हितों पर किसी भी हमले को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना जाएगा और उसका तत्काल जवाब दिया जाएगा।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि पाकिस्तानी झंडे वाले या पाकिस्तान से जुड़े वाणिज्यिक जहाजों पर किसी भी हमले को पाकिस्तान पर हमला माना जाएगा और उसके अनुरूप कार्रवाई की जाएगी।
शहबाज शरीफ ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में कहा कि उन्होंने सऊदी तेल टैंकरों पर हुए हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं, समुद्री व्यापार और नौवहन की स्वतंत्रता के लिए खतरा पैदा करती हैं तथा क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा को प्रभावित करती हैं।
हूतियों ने पहले की थी समुद्री नाकेबंदी की घोषणा
हूती विद्रोहियों ने इससे पहले सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की घोषणा करते हुए कहा था कि वे बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सऊदी जहाजों को निशाना बनाएंगे। उनका कहना था कि यह कदम यमन के बंदरगाहों और हवाई अड्डों पर लगाए गए प्रतिबंधों के जवाब में उठाया गया है।
