मॉस्को: रूस-यूक्रेन युद्ध को चार साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन संघर्ष थमने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहे हैं। लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को आमने-सामने बातचीत का प्रस्ताव दिया था। हालांकि अब पुतिन ने इस प्रस्ताव को स्पष्ट रूप से ठुकरा दिया है। इससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं को एक और झटका लगा है।
यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने हाल ही में पुतिन के नाम एक खुला पत्र लिखकर युद्ध समाप्त करने की दिशा में सीधे संवाद की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि रूस और यूक्रेन की आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए युद्ध खत्म करने के लिए गंभीर पहल की जानी चाहिए। उन्होंने युद्धबंदियों की अदला-बदली, नागरिकों और बच्चों की वापसी जैसे मुद्दों को भी समाधान की दिशा में अहम कदम बताया था।
जेलेंस्की ने रूस की सैन्य स्थिति पर उठाए सवाल
अपने पत्र में जेलेंस्की ने दावा किया कि रूस के संसाधनों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है और लंबे समय तक युद्ध जारी रखना उसके लिए आसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यूक्रेन अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगा और उसे अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिलता रहेगा।
जेलेंस्की ने यह भी कहा कि उन्हें मई महीने के दौरान युद्ध मोर्चे पर रूसी सैनिकों के नुकसान से जुड़ी रिपोर्ट मिली है। उनके अनुसार, मारे गए और गंभीर रूप से घायल सैनिकों की संख्या 30 हजार से अधिक रही। उन्होंने दावा किया कि युद्धक्षेत्र में होने वाले नुकसान का विस्तृत रिकॉर्ड और वीडियो प्रमाण उनके पास मौजूद हैं।
आमने-सामने बातचीत के प्रस्ताव को पुतिन ने किया खारिज
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने जेलेंस्की के प्रत्यक्ष बैठक वाले प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध समाप्त करने के प्रयासों की चर्चा हो रही है, पुतिन का यह रुख दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
BRICS की ताकत गिनाते हुए G7 पर साधा निशाना
इस बीच पुतिन ने BRICS देशों की आर्थिक ताकत का भी खुलकर उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में वैश्विक आर्थिक वृद्धि में लगभग 49 प्रतिशत योगदान BRICS देशों का रहा है, जबकि G7 देशों का योगदान करीब 18 प्रतिशत के आसपास है।
पुतिन के मुताबिक, क्रय शक्ति समता (PPP) के आधार पर वैश्विक जीडीपी में BRICS देशों की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जबकि G7 देशों की हिस्सेदारी 29 प्रतिशत से भी कम है। उन्होंने दावा किया कि BRICS ने वर्षों पहले ही G7 को पीछे छोड़ दिया था और यह अंतर लगातार बढ़ता जा रहा है।
भारत की भूमिका को लेकर भी की विशेष टिप्पणी
रूसी राष्ट्रपति ने भारत की आर्थिक और तकनीकी क्षमता की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है और वैश्विक सॉफ्टवेयर बाजार में उसकी महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 2026 में BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी भारत करेगा। इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए पुतिन के सितंबर में भारत आने की संभावना जताई जा रही है।
