‘मेलोडी’ से लेकर ‘Parle-G’ तक: जानिए कैसे बना पारले भारत का सबसे बड़ा बिस्किट साम्राज्य, एक बंद फैक्ट्री से शुरू हुआ था सफर

नई दिल्ली: भारतीय घरेलू ब्रांड पारले का सफर सिर्फ एक कंपनी की कहानी नहीं, बल्कि देश के मध्यमवर्ग की बदलती जीवनशैली और आर्थिक उभार का प्रतीक माना जाता है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को ‘मेलोडी’ चॉकलेट गिफ्ट किए जाने के बाद यह ब्रांड एक बार फिर चर्चा में आ गया है, जिससे सोशल मीडिया पर इसके ऐतिहासिक सफर की यादें ताजा हो गई हैं।

1929 में मुंबई से हुई थी शुरुआत
पारले की शुरुआत साल 1929 में मुंबई के विले पारले इलाके में एक बंद पड़ी फैक्ट्री से हुई थी। मोहनलाल चौहान और उनके 12 साथियों ने मिलकर कन्फेक्शनरी (टॉफी-कैंडी) बनाने का काम शुरू किया। शुरुआती दौर में कंपनी का कोई तय नाम नहीं था, बाद में इसे ‘पारले’ नाम दिया गया, जो उसी इलाके से जुड़ा था।

1939 में आया पहला बिस्किट ‘Parle Gluco’
साल 1939 में कंपनी ने अपना पहला बिस्किट ‘Parle Gluco’ लॉन्च किया, जो उस समय ब्रिटिश बिस्किट कंपनियों के महंगे विकल्प के तौर पर बाजार में आया। इसका उद्देश्य भारतीय उपभोक्ताओं को सस्ता और किफायती विकल्प उपलब्ध कराना था।

Parle-G बनने की कहानी
1980 के दशक तक बाजार में ‘ग्लुको’ नाम से कई ब्रांड आने लगे, जिससे भ्रम की स्थिति बनी। इसके बाद 1982 में कंपनी ने इसका नाम बदलकर ‘Parle-G’ कर दिया। शुरुआत में ‘G’ का मतलब ग्लूकोज बताया गया, जिसे बाद में विज्ञापनों में ‘G for Genius’ के रूप में लोकप्रिय किया गया।

‘मेलोडी इतनी चॉकोलेटी क्यों है’ बना आइकॉनिक स्लोगन
पारले ने 1983 में कैंडी सेगमेंट में कदम रखते हुए ‘मेलोडी’ लॉन्च किया। यह अपने अनोखे डबल लेयर फॉर्मूले के लिए मशहूर हुआ, जिसमें बाहर कैरामेल और अंदर लिक्विड चॉकलेट की परत होती है। 90 के दशक का मशहूर विज्ञापन “मेलोडी इतनी चॉकोलेटी क्यों है?” आज भी लोगों की यादों में ताजा है।

आज भी बाजार में मजबूत पकड़
पारले सिर्फ Parle-G या Melody तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पोर्टफोलियो में क्रैकजैक, मोनैको, हाइड एंड सीक, 20-20, पारले रस्क, पॉपिंस और अन्य कई लोकप्रिय उत्पाद शामिल हैं। कंपनी का नेटवर्क देशभर में लाखों रिटेल स्टोर्स तक फैला हुआ है।

दुनिया का सबसे बड़ा बिस्किट ब्रांड
रिपोर्ट्स के अनुसार Parle-G दुनिया का सबसे ज्यादा बिकने वाला बिस्किट ब्रांड माना जाता है। अनुमान के मुताबिक भारत में हर सेकंड हजारों पैकेट्स की खपत होती है और कंपनी हर महीने करीब 100 करोड़ पैकेट्स का उत्पादन करती है।

बड़ा बिजनेस नेटवर्क और मजबूत पकड़
पारले का सालाना कारोबार 18,000 करोड़ रुपये से अधिक बताया जाता है। कंपनी के देशभर में 130 से ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं और इसके प्रोडक्ट्स भारत के ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर महानगरों तक हर जगह उपलब्ध हैं।

एक ब्रांड से कहीं ज्यादा पारले की पहचान
मुंबई की एक बंद फैक्ट्री से शुरू हुआ यह सफर आज भारत के हर घर की चाय और बचपन की यादों से जुड़ चुका है। पारले का यह साम्राज्य सिर्फ एक बिजनेस स्टोरी नहीं, बल्कि भारतीय उपभोक्ता संस्कृति की मजबूत कहानी बन चुका है।

 

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