नई दिल्ली: पाकिस्तान के साथ भारत के संबंधों और भविष्य की रणनीति को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महासचिव दत्तात्रेय होसबले का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि पुलवामा जैसी घटनाओं के बाद पाकिस्तान को सख्त और पूरी ताकत से जवाब दिया जाना चाहिए, लेकिन इसके बावजूद दोनों देशों के बीच बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं होने चाहिए।
पाकिस्तान के साथ बातचीत और जवाबी कार्रवाई पर बयान
दत्तात्रेय होसबले ने कहा कि जब भी देश में पुलवामा जैसी आतंकी घटनाएं होती हैं, तो भारत को पाकिस्तान को करारा जवाब देना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलना चाहिए कि पाकिस्तान के साथ संवाद पूरी तरह समाप्त कर दिया जाए। उनके अनुसार, किसी भी स्तर पर बातचीत के चैनल खुले रहना जरूरी है ताकि भविष्य में हालात को संभालने की गुंजाइश बनी रहे।
वीजा, व्यापार और सांस्कृतिक रिश्तों पर जोर
RSS महासचिव ने आगे कहा कि भारत और पाकिस्तान को एक-दूसरे को वीजा देना चाहिए और खेल, व्यापार तथा सांस्कृतिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध बेहद पुराने हैं और यह भी तथ्य है कि कभी दोनों एक ही राष्ट्र रहे हैं, इसलिए पूर्ण दूरी व्यावहारिक समाधान नहीं है।
सनातन धर्म पर टिप्पणी और प्रतिक्रिया
सनातन धर्म को लेकर उठ रहे सवालों पर भी दत्तात्रेय होसबले ने प्रतिक्रिया दी। तमिलनाडु के नेता प्रतिपक्ष के उस बयान पर, जिसमें सनातन धर्म को समाप्त करने की बात कही गई थी, उन्होंने कहा कि यह उनकी व्यक्तिगत राय है और जनता ने चुनाव में इसका जवाब दे दिया है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म कभी समाप्त नहीं हो सकता, क्योंकि यह इस राष्ट्र की आत्मा और भावना से जुड़ा हुआ है।
सनातन धर्म को बताया शाश्वत जीवन मूल्य
होसबले ने कहा कि सनातन धर्म केवल किसी धार्मिक परंपरा का नाम नहीं है, बल्कि यह एक शाश्वत जीवन मूल्य है। उन्होंने इसे बरगद के पेड़ की तरह बताया, जिसकी जड़ें समय के साथ और मजबूत होती जाती हैं और जो सदैव हरा-भरा बना रहता है। उनके अनुसार, सनातन की यही शाश्वतता इसकी सबसे बड़ी शक्ति है।
पश्चिम एशिया संघर्ष पर भी रखी राय
पश्चिम एशिया में जारी तनाव पर टिप्पणी करते हुए दत्तात्रेय होसबले ने कहा कि यह संघर्ष किसी सभ्यताओं के टकराव का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे मुख्य कारण तेल और संसाधन हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अपनी भूमिका निभाकर विभिन्न देशों और उनके नेतृत्व को सद्बुद्धि की ओर प्रेरित करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
