स्मार्ट मीटर जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपी, मीटर सटीक बताए जाने के बावजूद खपत बढ़ोतरी के आंकड़ों से उठे सवाल

लखनऊ: स्मार्ट मीटरों की गुणवत्ता की जांच के लिए गठित चार सदस्यीय समिति की अंतरिम रिपोर्ट सरकार को सौंप दी गई है। रिपोर्ट में स्मार्ट मीटरों को सटीक बताया गया है, लेकिन इसके बाद अब इस रिपोर्ट पर सवाल खड़े होने लगे हैं। बिजली कंपनियों द्वारा पहले दिए गए खपत वृद्धि के आंकड़े इस पूरे मामले को विवादित बना रहे हैं।

मीटर सटीक, लेकिन खपत बढ़ने के आंकड़े से बढ़ा विवाद
मार्च-अप्रैल में नियामक आयोग की बिजली दरों पर हुई सुनवाई से पहले सभी विद्युत वितरण निगमों से स्मार्ट मीटर लगाने से पहले और बाद के आंकड़ों का तुलनात्मक विवरण मांगा गया था। वितरण निगमों की ओर से दी गई रिपोर्ट में स्वीकार किया गया था कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ताओं की बिजली खपत में बढ़ोतरी दर्ज हुई है, हालांकि यह वृद्धि अलग-अलग क्षेत्रों में अलग रही।

क्षेत्रवार खपत वृद्धि के अलग-अलग आंकड़े सामने आए
रिपोर्ट के अनुसार पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम में सबसे अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई, जहां स्मार्ट मीटर लगने के बाद प्रति उपभोक्ता लगभग 84 प्रतिशत की वृद्धि और औसतन 100 यूनिट तक का इजाफा बताया गया। दक्षिणांचल में 8 प्रतिशत, पूर्वांचल में 16 प्रतिशत और मध्यांचल विद्युत वितरण निगम में औसतन 3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इन अलग-अलग आंकड़ों ने रिपोर्ट की सटीकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामला पहुंचा नियामक आयोग, स्वतंत्र जांच की मांग
स्मार्ट मीटर जांच की अंतरिम रिपोर्ट सामने आने के बाद मामला नियामक आयोग तक पहुंच गया है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने सोमवार को लोक महत्व याचिका दायर कर मांग की है कि स्मार्ट मीटरों की जांच बेंगलुरु स्थित सेंट्रल पावर रिसर्च इंस्टीट्यूट से कराई जाए और उसकी रिपोर्ट आयोग को सौंपी जाए।

85 लाख स्मार्ट मीटर और शिकायतों का दावा
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा के अनुसार प्रदेश में करीब 85 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिनमें से अधिकांश प्रीपेड मोड में संचालित हो रहे हैं। उनका कहना है कि लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि स्मार्ट मीटर तेज चल रहे हैं और उपभोक्ताओं का बिजली खर्च असामान्य रूप से बढ़ गया है।

पहले जांच में भी सामने आई थीं खामियां
परिषद का यह भी कहना है कि वर्ष 2020 में जब स्मार्ट मीटरों की जांच तत्कालीन ऊर्जा मंत्री के निर्देश पर सेंट्रल पावर रिसर्च इंस्टीट्यूट से कराई गई थी, तब कई तकनीकी खामियां सामने आई थीं। इसी आधार पर एक बार फिर स्वतंत्र जांच की मांग की जा रही है।

जांच को लेकर मानकों पर जोर
केंद्र सरकार की स्टैंडर्ड बिडिंग गाइडलाइन के तहत स्मार्ट मीटरों की गुणवत्ता पर सवाल उठने की स्थिति में जांच केवल सेंट्रल पावर रिसर्च इंस्टीट्यूट, यूटिलिटी लैब या एनएबीएल लैब से ही कराई जा सकती है। ऐसे में किसी अन्य संस्थान से जांच कराने को मानकों के विपरीत बताया जा रहा है।

 

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