108 सीटें जीतकर भी सरकार नहीं बना पा रहे विजय, सत्ता का सस्पेंस

साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

Vijay की राजनीति में एंट्री को कई लोगों ने सिर्फ स्टारडम का एक्सटेंशन माना था, लेकिन तमिलनाडु चुनाव 2026 ने तस्वीर पूरी तरह बदल दी। Tamilaga Vettri Kazhagam यानी TVK ने 108 सीटें जीतकर राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनने का तमगा हासिल कर लिया। लेकिन असली झटका यहीं छिपा है—इतिहास रचने वाली जीत के बावजूद विजय अभी सत्ता से 10 कदम दूर खड़े हैं। 238 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 118 है और यही नंबर अब तमिलनाडु की राजनीति को suspense thriller बना चुका है।

राज्यपाल के दरबार में पहुंची TVK

चुनाव नतीजों के बाद TVK ने सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया। पार्टी को उम्मीद थी कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते राज्यपाल उन्हें मौका देंगे, लेकिन मामला इतना आसान नहीं निकला। राज्यपाल ने साफ कर दिया कि सरकार वही बनाएगा जो सदन में बहुमत साबित करेगा। यानी विजय को अब सिर्फ जनता का समर्थन नहीं, विधायकों की गिनती भी जुटानी होगी। यही वजह है कि चेन्नई से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक जोड़तोड़ का दौर तेज हो चुका है।

समर्थन की तलाश में विजय

TVK का दावा है कि कुछ निर्दलीय और छोटे दल उसके संपर्क में हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि उन्हें अतिरिक्त समर्थन मिल जाएगा, लेकिन विरोधी दल इस दावे का मजाक उड़ा रहे हैं। AIADMK के नेताओं ने तंज कसते हुए कहा कि “अगर समर्थन है तो नंबर दिखाइए।” कांग्रेस के संभावित समर्थन को लेकर भी बयानबाजी तेज है। विपक्षी दलों का आरोप है कि सत्ता पाने के लिए अब पर्दे के पीछे डील पॉलिटिक्स शुरू हो चुकी है।

चुनाव बाद हिंसा ने बढ़ाई चिंता

सरकार गठन के सस्पेंस के बीच राज्य के कई हिस्सों से झड़पों और तनाव की खबरें सामने आ रही हैं। राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच टकराव ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। कुछ इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि हालात नियंत्रण में रहें। चुनाव खत्म हो चुका है, लेकिन राजनीतिक गर्मी अभी भी सड़कों पर दिखाई दे रही है। यही वजह है कि तमिलनाडु में माहौल सिर्फ राजनीतिक नहीं, भावनात्मक भी बन गया है।

फिल्मों के हीरो से सिस्टम के खिलाड़ी तक

विजय ने फिल्मों में कई बार भ्रष्ट सिस्टम को चुनौती देने वाले किरदार निभाए हैं, लेकिन असली राजनीति कैमरे की स्क्रिप्ट से कहीं ज्यादा कठिन साबित हो रही है। चुनाव जीतना एक बात है, लेकिन सरकार बनाना पूरी तरह अलग खेल। यहां speeches से ज्यादा मायने रखते हैं numbers, alliances और power balance। विजय के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यही है कि क्या वह mass popularity को stable political power में बदल पाएंगे या नहीं।

क्या तमिलनाडु में फिर होगा बड़ा राजनीतिक खेल?

अगर TVK बहुमत साबित नहीं कर पाती तो तमिलनाडु में कई नए समीकरण बन सकते हैं। गठबंधन सरकार, राष्ट्रपति शासन या दोबारा चुनाव—तीनों संभावनाएं राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगले कुछ दिन राज्य की राजनीति का भविष्य तय करेंगे। हर पार्टी फिलहाल अपने पत्ते छिपाकर चल रही है।

बदल रहा है तमिलनाडु का राजनीतिक मूड

Tamil Nadu लंबे समय से द्रविड़ राजनीति का मजबूत गढ़ रहा है, लेकिन इस चुनाव ने संकेत दे दिया है कि राज्य की नई पीढ़ी अब पारंपरिक राजनीतिक चेहरों से अलग विकल्प तलाश रही है। TVK का उभार सिर्फ एक चुनावी सफलता नहीं, बल्कि राजनीतिक बदलाव का संकेत माना जा रहा है। यही वजह है कि पूरे देश की नजर अब तमिलनाडु पर टिक गई है।

विजय ने चुनाव जीतकर यह साबित कर दिया कि उनकी लोकप्रियता सिर्फ सिनेमाघरों तक सीमित नहीं है। लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने के लिए उन्हें अब राजनीति का सबसे कठिन अध्याय पार करना होगा। 108 सीटों ने उन्हें सबसे बड़ा चेहरा बना दिया है, लेकिन सत्ता की असली चाबी अभी भी बाकी 10 नंबरों में छिपी हुई है। तमिलनाडु फिलहाल इंतजार में है—और देश देख रहा है कि अगली चाल कौन चलता है।

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