
गंगा किनारे अब सिर्फ आरती नहीं, अर्थव्यवस्था भी चमकेगी, गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के नक्शे पर खिंची वह रेखा है, जो दूरी नहीं, विकास घटाएगी।
लंबाई, लागत और डिजाइन
594 किलोमीटर लंबा यह मेगा एक्सप्रेसवे 36,402 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा है। मेरठ से प्रयागराज तक फैला यह कॉरिडोर तेज़, सुरक्षित और भविष्य-तैयार कनेक्टिविटी देगा। इसका डिजाइन और निर्माण उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने किया है। एक्सप्रेसवे पर 21 इंटरचेंज, 2 मुख्य टोल प्लाजा, 2 अतिरिक्त मेन टोल और 19 रैम्प टोल प्लाजा प्रस्तावित हैं।
किन जिलों से गुजरेगा?
पश्चिमी यूपी की धड़कन को पूर्वी यूपी की गति से जोड़ने वाला यह रास्ता मेरठ, हापुड़, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज जैसे जिलों से होकर गुजरेगा। गांवों से लेकर शहरों तक, यह एक्सप्रेसवे एक आर्थिक धुरी का काम करेगा।
स्पीड और सेफ्टी का परफेक्ट कॉम्बो
फिलहाल 6 लेन का यह एक्सप्रेसवे भविष्य में 8 लेन तक विस्तारित किया जाएगा। यहां 120 किमी/घंटा की स्पीड से गाड़ियां दौड़ सकेंगी। CCTV, इमरजेंसी कॉल बॉक्स, एम्बुलेंस और ITMS जैसे स्मार्ट फीचर्स इसे हाईवे नहीं, “स्मार्टवे” बना देते हैं।
हाईवे पर एयरस्ट्रिप: रणनीतिक ताकत
शाहजहांपुर के पास बनी 3.2 किमी लंबी एयरस्ट्रिप इस प्रोजेक्ट का गेम-चेंजर है। जरूरत पड़ने पर यहां वायुसेना के विमान लैंड कर सकते हैं। सड़क और सुरक्षा का यह संगम इसे बेहद खास बनाता है।
IMLC: सड़क के किनारे इंडस्ट्री का शहर
एक्सप्रेसवे के किनारे Integrated Manufacturing & Logistics Clusters (IMLC) विकसित किए जाएंगे। यहां वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स और इंडस्ट्रियल हब बनेंगे। निवेशकों को सब्सिडी और टैक्स छूट मिलेगी, और युवाओं के लिए रोजगार के नए दरवाजे खुलेंगे।
गंगा एक्सप्रेसवे केवल एक रोड प्रोजेक्ट नहीं… यह उत्तर प्रदेश का “विकास एक्सीलरेटर” है। जहां पहले दूरी मीलों में नापी जाती थी, अब उसे मिनटों में मापा जाएगा।
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