पिता से बगावत … K कविता ने लॉन्च की नई पार्टी, तेलंगाना में सियासी भूचाल!

संजीव पॉल
संजीव पॉल

एक बेटी ने अपने ही पिता की सियासत को चुनौती दे दी। एक परिवार… जो सत्ता का सिंबल था, अब दरारों में टूटता दिख रहा है। और इसी दरार से जन्म हुई—एक नई पार्टी, एक नई लड़ाई।

नई पार्टी लॉन्च—सियासत में नया मोड़

के कविता ने हैदराबाद में अपनी नई पार्टी TRS-तेलंगाना राष्ट्र सेना लॉन्च कर दी है। यह सिर्फ एक लॉन्च नहीं…बल्कि तेलंगाना की राजनीति में एक सीधा पावर चैलेंज है।

परिवार में दरार—कहानी यहीं से शुरू हुई

कविता, के. चंद्रशेखर राव (KCR) की बेटी हैं और लंबे समय तक भारत राष्ट्र समिति का बड़ा चेहरा रही हैं। लेकिन 2025 में मामला बिगड़ गया। उन्होंने अपने ही भाई के टी रामा राव और चचेरे भाई टी हरीश राव पर गंभीर आरोप लगाए कि पार्टी के अंदर गड़बड़ी है और KCR की छवि को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। नतीजा? उन्हें “एंटी-पार्टी एक्टिविटी” के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया। जब लड़ाई घर के अंदर शुरू हो…तो राजनीति बाहर फटती है।

नई पार्टी क्यों?—रणनीति या मजबूरी?

पार्टी से बाहर होने के बाद कविता चुप नहीं बैठीं। उन्होंने ‘सोशल तेलंगाना’ का एजेंडा उठाया, लोगों से सीधे संवाद किया और एक अलग मंच तैयार करना शुरू कर दिया। नई पार्टी को लेकर माना जा रहा है कि सामाजिक न्याय, क्षेत्रीय पहचान और नई राजनीति इन तीन मुद्दों पर वो अपना खेल खेलने वाली हैं।

अंदर की कहानी—पुरानी नाराजगी, नया विस्फोट

कविता का राजनीतिक संघर्ष आज का नहीं है। बताया जाता है कि उन्हें पहले से ही इस बात का मलाल था कि टी हरीश राव को जल्दी राजनीतिक अवसर मिल गए, जबकि उन्हें इंतजार करना पड़ा। यह असंतोष धीरे-धीरे बढ़ता गया…और अब जाकर खुलकर सामने आया। राजनीति में सबसे खतरनाक चीज विरोधी नहीं…बल्कि अपनों की महत्वाकांक्षा होती है।

राजनीतिक सफर—ऊंचाई से गिरावट तक

2014 में कविता ने निजामाबाद से लोकसभा चुनाव जीतकर शानदार एंट्री की। लेकिन इसके बाद उनका करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा—

  • 2019 में चुनाव हार
  • शराब नीति विवाद में नाम
  • 6 महीने की कानूनी लड़ाई
  • 2023 और 2024 में BRS की हार

इन सबने उनकी राजनीतिक जमीन हिला दी।

लीक हुआ लेटर—और खत्म हो गया रिश्ता

सबसे बड़ा झटका तब लगा जब उनका एक लेटर लीक हुआ, जिसमें उन्होंने पार्टी के अंदरूनी नेताओं पर खुलकर सवाल उठाए थे। यही लेटर उनकी BRS से विदाई का कारण बना।

अब सवाल यह है कि क्या कविता की नई पार्टी तेलंगाना में असर डाल पाएगी? या यह सिर्फ एक व्यक्तिगत सियासी लड़ाई बनकर रह जाएगी? क्योंकि सामने वही परिवार है…जिसने राज्य की राजनीति को सालों तक कंट्रोल किया है। नई पार्टी बनाना आसान है…लेकिन सत्ता छीनना—सबसे मुश्किल खेल।

के कविता का यह कदम सिर्फ एक राजनीतिक फैसला नहीं…बल्कि एक खुली बगावत है। एक बेटी बनाम एक राजनीतिक साम्राज्य। अब यह लड़ाई सिर्फ वोट की नहीं— बल्कि विरासत, पहचान और सत्ता की है। तेलंगाना की राजनीति अब दो हिस्सों में बंट चुकी है एक KCR का सिस्टम…और दूसरा, उसी सिस्टम से निकली चुनौती।

91% बंगाल, 84% तमिलनाडु—मतदान ने हिला दी राजनीति!

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