
पटना के राजनीतिक गलियारों में आजका दिन असामान्य रूप से दिलचस्प था. विधानसभा परिसर में वोटिंग चल रही थी, लेकिन सियासत का असली ड्रामा बैलेट बॉक्स से बाहर लिखा जा रहा था.
राज्यसभा की पांच सीटों के लिए हुए चुनाव में मतदान प्रक्रिया पूरी होते ही एक राजनीतिक कहानी साफ नजर आने लगी.
कहानी यह कि जहां NDA के सभी विधायक पूरी तैयारी के साथ वोट देने पहुंचे, वहीं विपक्षी महागठबंधन के चार विधायक वोटिंग से ही गायब हो गए. राजनीति में अनुपस्थिति भी कभी-कभी सबसे बड़ा बयान बन जाती है.
चार विधायक नहीं पहुंचे, महागठबंधन को झटका
वोटिंग के दौरान विपक्षी महागठबंधन को तब बड़ा झटका लगा जब उसके चार विधायकों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया.
इनमें शामिल हैं
- राजद विधायक फैसल रहमान (ढाका)
- कांग्रेस विधायक सुरेंद्र कुशवाहा (वाल्मीकिनगर)
- कांग्रेस विधायक मनोज विश्वास (फारबिसगंज)
- कांग्रेस विधायक मनोहर प्रसाद (मनिहारी)
इनकी अनुपस्थिति के कारण महागठबंधन के खाते में सिर्फ 37 वोट ही दर्ज हो सके. राजनीतिक हलकों में यह सवाल तेजी से उठने लगा कि यह रणनीतिक चुप्पी थी या अंदरूनी असहमति का संकेत.
NDA का पूरा दम, पांचों सीटों पर जीत तय
दूसरी तरफ NDA ने चुनावी गणित को पूरी तरह अपने पक्ष में कर लिया. गठबंधन के सभी 202 विधायक मतदान के लिए मौजूद रहे, जिससे चुनावी तस्वीर लगभग साफ हो गई. नतीजों की औपचारिक घोषणा से पहले ही यह तय माना जा रहा है कि पांचों सीटें NDA के खाते में जाएंगी.
इन उम्मीदवारों की जीत लगभग तय
NDA की ओर से मैदान में उतरे उम्मीदवारों को विधायकों का जबरदस्त समर्थन मिला है.

संभावित विजेताओं में शामिल हैं
- नितिन नबीन (BJP)
- शिवेश कुमार सिंह (BJP)
- नीतीश कुमार
- रामनाथ ठाकुर
- उपेंद्र कुशवाहा (RLM)
विशेष रूप से शिवेश कुमार सिंह को लगभग 38 वोट मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है. यह आंकड़ा बताता है कि NDA ने न केवल संख्या बल बल्कि संगठनात्मक अनुशासन भी दिखाया है.
विपक्ष की एकजुटता पर सवाल
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि चार विधायकों का मतदान में शामिल न होना केवल संयोग नहीं माना जा सकता.
यह संभव है कि इसके पीछे आंतरिक नाराजगी, राजनीतिक सौदेबाजी या फिर रणनीतिक दूरी जैसे कारण हों. खासकर कांग्रेस के तीन विधायकों का मतदान न करना महागठबंधन की एकजुटता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा गया है.
विधानसभा का गणित क्या कहता है
बिहार विधानसभा में कुल 243 सदस्य हैं. वर्तमान स्थिति में NDA के पास 202 विधायक जबकि विपक्ष के पास अपेक्षाकृत कम संख्या है. इस गणित के कारण चुनाव परिणाम पहले से ही NDA के पक्ष में झुका हुआ माना जा रहा था. लेकिन विपक्षी विधायकों की अनुपस्थिति ने मुकाबले को और भी एकतरफा बना दिया.
बिहार की राजनीति: संकेत दूर तक जाएंगे
राजनीति में कभी-कभी चुनाव से ज्यादा चर्चा अनुपस्थित वोटों की होती है. बिहार के इस राज्यसभा चुनाव ने यही दिखाया है. NDA के लिए यह जीत सिर्फ पांच सीटों की नहीं, बल्कि संगठनात्मक एकजुटता का प्रदर्शन भी है. वहीं महागठबंधन के लिए यह चुनाव एक ऐसा आईना बन गया है जिसमें अंदरूनी दरारें साफ दिखाई देने लगी हैं.
क्या सच में गायब हो गए नेतन्याहू? इजरायली PMO का बड़ा बयान
