ईरान के बाद पाकिस्तान? जंग के बीच नया डर, इस्लामाबाद में बेचैनी

हुसैन अफसर
हुसैन अफसर

मिडिल ईस्ट की धरती इन दिनों बारूद की गंध से भरी हुई है. एक तरफ Israel की सेना गाजा और लेबनान में हमले कर रही है. दूसरी तरफ Iran के साथ तनाव युद्ध के स्तर तक पहुंच चुका है.

लेकिन इस पूरे संकट के बीच एक नया डर उभर रहा है. यह डर है Pakistan का.

इस्लामाबाद के रणनीतिक गलियारों में धीरे-धीरे यह चर्चा तेज हो रही है कि अगर क्षेत्रीय शक्ति संतुलन बदला…तो क्या ईरान के बाद अगला निशाना पाकिस्तान हो सकता है?

सवाल बड़ा है. और जवाब अभी धुंध में छिपा हुआ है.

युद्ध की आग और बढ़ती आशंकाएं

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने पूरे क्षेत्र की रणनीतिक गणित बदल दी है. इजरायल की सैन्य कार्रवाई सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं दिख रही. गाजा, लेबनान और ईरान तक फैले तनाव ने कई देशों को चौकन्ना कर दिया है.

पाकिस्तान के कई रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर क्षेत्र में शक्ति संतुलन तेजी से बदलता है तो इस्लामाबाद भी भू-राजनीतिक समीकरण का हिस्सा बन सकता है.

हालांकि यह फिलहाल अटकलबाजी ज्यादा और वास्तविक खतरा कम माना जा रहा है.

एक्सपर्ट क्या कहते हैं

दक्षिण एशिया के शोधकर्ता Altaf Parvez का मानना है कि ईरान के बाद पाकिस्तान पर सीधे हमले की संभावना दूर की कौड़ी लगती है. लेकिन वे यह भी कहते हैं कि वैश्विक संस्थाओं की कमजोरी और क्षेत्रीय गठजोड़ों में बदलाव नई जटिलताएं पैदा कर सकते हैं.

उनके मुताबिक अंतरराष्ट्रीय संगठनों की सीमित भूमिका भी कई बार क्षेत्रीय संकटों को और उलझा देती है.

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का बयान

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री Khawaja Muhammad Asif ने हाल ही में कहा कि अगर ईरान में शक्ति संतुलन बदला तो उसका असर पाकिस्तान तक पहुंच सकता है. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि क्षेत्रीय गठजोड़ भविष्य में पाकिस्तान के खिलाफ इस्तेमाल किए जा सकते हैं.

हालांकि अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान अधिकतर राजनीतिक संदेश की तरह देखा जाना चाहिए.

क्योंकि वास्तविक सैन्य टकराव कई जटिल कारकों पर निर्भर करता है.

परमाणु ताकत और रणनीतिक गणित

एक बड़ा सवाल यह भी है कि पाकिस्तान परमाणु शक्ति संपन्न देश है. ऐसे में किसी भी संभावित संघर्ष की कीमत बेहद भारी हो सकती है. वैश्विक सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि परमाणु हथियारों वाले देशों के बीच सीधे सैन्य संघर्ष की संभावना अक्सर कम होती है.

क्योंकि इसका परिणाम क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक संकट बन सकता है.

बदलती वैश्विक राजनीति

इस पूरे मुद्दे का एक बड़ा पहलू भू-राजनीतिक गठजोड़ भी है. पाकिस्तान के तुर्की और सऊदी अरब के साथ बढ़ते रक्षा संबंधों पर भी कई विश्लेषक नजर रखे हुए हैं.

दूसरी तरफ इजरायल की रणनीतिक साझेदारियां भी तेजी से मजबूत हुई हैं. इन सबके बीच मिडिल ईस्ट और दक्षिण एशिया की राजनीति एक जटिल शतरंज बन चुकी है.

जहां हर चाल का असर कई देशों तक पहुंच सकता है.

डर ज्यादा, हकीकत कम

सच्चाई यह है कि अभी तक ऐसा कोई ठोस संकेत नहीं है कि इजरायल सीधे पाकिस्तान को निशाना बनाने की योजना बना रहा है. लेकिन भू-राजनीति की दुनिया में कल्पनाएं भी कई बार रणनीतिक बहस का हिस्सा बन जाती हैं.

इसलिए इस्लामाबाद में उठ रही आशंकाएं सिर्फ डर नहीं…बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों की झलक भी हैं. और अंतरराष्ट्रीय राजनीति का यही नियम है. कभी-कभी युद्ध सिर्फ सीमाओं पर नहीं होता…वह दिमागों और रणनीतियों के नक्शों में भी लड़ा जाता है.

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