“साहब, कस्टडी में ही फेरे करा दो…” भोपाल में मंडप से उठा गैंगस्टर दूल्हा, मेहंदी लगी दुल्हन थाने पहुंची

सत्येन्द्र सिंह ठाकुर
सत्येन्द्र सिंह ठाकुर

भोपाल की एक शादी… जहां ढोल बजना था, वहां पुलिस की जीप आकर रुक गई. जहां पंडित मंत्र पढ़ने वाला था, वहां पुलिस ने हथकड़ी पढ़ दी.

और फिर जो दृश्य सामने आया वह किसी फिल्म का क्लाइमेक्स नहीं, बल्कि असल जिंदगी की कड़वी पटकथा था.

मेहंदी लगे हाथ…चेहरे पर हल्दी…गले में जयमाला…और वही दुल्हन कुछ देर बाद थाने के दरवाजे पर खड़ी थी.

उसकी आवाज कांप रही थी. “साहब… अगर छोड़ नहीं सकते तो कस्टडी में ही फेरे करा दो.”

मंडप से सीधे पुलिस की गाड़ी

मामला मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के कोहेफिजा इलाके का है. यहां एक मैरिज गार्डन में शादी की तैयारियां चल रही थीं. मेहमान पहुंच चुके थे. हल्दी की रस्म हो चुकी थी और शादी का माहौल पूरी तरह तैयार था. लेकिन इसी बीच पुलिस को एक सूचना मिली.

सूचना यह थी कि हनीट्रैप गैंग का सरगना भी उसी मंडप में बैठा हुआ है. पुलिस टीम मौके पर पहुंची और हल्दी कार्यक्रम के बीच से ही दूल्हे को गिरफ्तार कर लिया.

दूल्हे का नाम था आकाश नीलकंठ उर्फ भूरा हड्डी.

“Illegal Gang” का खुलासा

पुलिस जांच में सामने आया कि आकाश एक संगठित गिरोह चला रहा था, जिसे “Illegal Gang” कहा जाता था. इस गैंग में करीब 15 युवक और युवतियां शामिल बताए जा रहे हैं. गिरोह का तरीका बेहद चालाक था. पहले किसी व्यक्ति को टारगेट किया जाता. फिर एक महिला को उससे दोस्ती के लिए भेजा जाता.

जब मुलाकात होती तो गैंग के बाकी सदस्य वहां पहुंच जाते. फिर शुरू होता असली खेल. आपत्तिजनक फोटो और वीडियो बनाकर ब्लैकमेल. और फिर मोटी रकम की मांग.

यानी यह पूरा गैंग डिजिटल युग का ब्लैकमेल इंडस्ट्री मॉडल चला रहा था.

मेहंदी लगी दुल्हन की गुहार

दूल्हे की गिरफ्तारी के बाद कहानी का सबसे भावुक दृश्य सामने आया. दुल्हन सीमा अपने परिवार के साथ सीधे थाने पहुंच गई. उसके हाथों में अभी भी मेहंदी लगी थी. चेहरे पर हल्दी थी. और गले में शादी की माला. वह बार-बार पुलिस से कह रही थी:

“साहब मेरी क्या गलती है… मुझे उसके जुर्म के बारे में कुछ नहीं पता था.”

उसने पुलिस से गुहार लगाई “अगर संभव हो तो उसे सिर्फ दो घंटे के लिए छोड़ दीजिए…नहीं तो कस्टडी में ही हमारी शादी करा दीजिए.

लेकिन पुलिस ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया.

कोर्ट ने भी नहीं दी राहत

दूल्हे के वकील ने भी कोर्ट से शादी की रस्म पूरी करने के लिए समय मांगा. लेकिन अदालत ने भी इस मांग को खारिज कर दिया. यानी मंडप से शुरू हुई कहानी सीधे जेल की सलाखों तक पहुंच गई.

अपराध और भावनाओं की टक्कर

सुरक्षा मामलों पर टिप्पणी करते हुए रिटायर्ड एसपी परेश पाण्डेय कहते हैं, “अपराधी की शादी, रिश्ते या सामाजिक कार्यक्रम कानून से ऊपर नहीं हो सकते. पुलिस अगर मौके पर कार्रवाई न करे तो अपराधियों के हौसले और बढ़ते हैं.”

वे आगे कहते हैं, “यह घटना भावनात्मक जरूर है, लेकिन कानून का काम भावनाओं से नहीं बल्कि सबूत और अपराध से तय होता है.”

समाज के लिए बड़ा सवाल

भोपाल की यह घटना कई सवाल छोड़ गई. क्या दुल्हन सच में अनजान थी? या फिर यह भी उस कहानी का हिस्सा था जिसे लोग समझ नहीं पाए? लेकिन एक बात साफ है. जिस मंडप में शादी का संगीत बजना था, वहां कानून की सायरन बज गई. और यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे तीखा व्यंग्य है.

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