
मिडिल ईस्ट की धरती इन दिनों बारूद की गंध से भरी हुई है. हर दिन नई धमाकों की खबरें… हर रात अनिश्चितता का सन्नाटा.
लेकिन इस डर और अफरातफरी के बीच एक राहत की खबर भी आई है. कतर से लगभग 500 भारतीय नागरिकों की घर वापसी शुरू हो चुकी है.
जब युद्ध की आग फैलती है, तब सबसे बड़ी चिंता उन लोगों की होती है जो घर से हजारों किलोमीटर दूर सिर्फ रोज़गार के लिए गए थे.
युद्ध के 15वें दिन राहत की पहली बड़ी खबर
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब 15वें दिन में प्रवेश कर चुका है. हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं और कई खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय नागरिक असमंजस में हैं.
इसी बीच दोहा स्थित भारतीय दूतावास ने जानकारी दी कि लगभग 500 भारतीय नागरिक कतर एयरवेज की उड़ानों से भारत के लिए रवाना हो चुके हैं.
इन यात्रियों ने मुख्य रूप से कोच्चि और अन्य भारतीय शहरों के लिए उड़ान भरी. यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब क्षेत्र में हवाई संचालन पूरी तरह सामान्य नहीं है.
सीमित उड़ानों के बीच राहत मिशन
भारतीय दूतावास ने बताया कि कतर का हवाई क्षेत्र अभी आंशिक रूप से खुला है. इस वजह से कतर एयरवेज फिलहाल सीमित उड़ानों का संचालन कर रही है.
इसके बावजूद एयरलाइन ने मानवीय आधार पर कई विशेष व्यवस्थाएं भी की हैं. दूतावास के अनुसार, प्राकृतिक कारणों से मौत का शिकार हुए दो भारतीय नागरिकों के पार्थिव शरीर भी उनके परिवार के साथ कोच्चि भेजे गए.
युद्ध की खबरों के बीच यह मानवीय पहल एक अलग कहानी भी सुनाती है.

14 मार्च को मुंबई के लिए उड़ान
भारतीय दूतावास ने एडवाइजरी जारी करते हुए बताया कि 14 मार्च को मुंबई के लिए भी एक उड़ान संचालित करने की योजना है. जो भारतीय नागरिक भारत से कतर आना चाहते हैं, वे उन उड़ानों का इस्तेमाल कर सकते हैं जो भारत से दोहा लौट रही हैं.
क्षेत्र में जारी तनाव के कारण उड़ानों का शेड्यूल कभी भी बदल सकता है. इसलिए यात्रियों को आधिकारिक अपडेट पर लगातार नजर रखने की सलाह दी गई है.
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
मिडिल ईस्ट मामलों के विशेषज्ञ हुसैन अफसर के अनुसार, “मिडिल ईस्ट में युद्ध का प्रभाव सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहता. इसका असर सबसे पहले विदेशी कामगारों और नागरिकों पर पड़ता है.”
वे कहते हैं कि खाड़ी देशों में लाखों भारतीय काम करते हैं और किसी भी बड़े संघर्ष के दौरान उनकी सुरक्षा भारत सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता बन जाती है.
जंग और प्रवासी मजदूरों की कहानी
सच कहें तो अंतरराष्ट्रीय राजनीति का एक अजीब गणित है. नेता युद्ध की रणनीति बनाते हैं…जनरल नक्शों पर तीर खींचते हैं…और हजारों किलोमीटर दूर काम कर रहे प्रवासी मजदूर अचानक खबरों की सुर्खियां बन जाते हैं.
मिडिल ईस्ट के इस संकट ने एक बार फिर यही दिखाया है. जब दुनिया के ताकतवर देश टकराते हैं, तो असली सवाल सिर्फ यही होता है घर से दूर काम कर रहे आम लोग आखिर सुरक्षित कैसे लौटेंगे?
रसोई पर ‘जंग’ का असर! LPG 144₹ महंगा, डिलीवरी लेट… लागू हुआ नियम
