
सुबह का वक्त, मंदिरों की घंटियों की आवाज और श्रद्धालुओं की भीड़। लेकिन इस बार Ayodhya की एक गली में अजीब सन्नाटा है। जहां रोज़ गरीबों और यात्रियों के लिए दाल-चावल की खुशबू उठती थी, वहां आज ताला लटका है।
वजह लिखी है एक छोटे से नोटिस पर “गैस की कमी के कारण राम रसोई आज बंद रहेगी।”
यह वही रसोई है जो वर्षों से श्रद्धालुओं और जरूरतमंदों को मुफ्त भोजन दे रही थी। और अब उसी के बंद होने से आस्था की नगरी में चर्चा और सियासत दोनों तेज हो गई हैं।
मंदिर के पास चलती थी सेवा की परंपरा
राम मंदिर के पास स्थित Amawa Temple के प्रबंधन द्वारा यह रसोई चलाई जाती थी। यहां रोज़ सैकड़ों लोगों को भोजन मिलता था। कई यात्रियों के लिए यह सिर्फ भोजन नहीं बल्कि एक राहत थी। कई गरीबों के लिए यह दिन का एकमात्र भरोसा था।
लेकिन हाल ही में रसोई के बाहर लगा नोटिस देखकर लोग हैरान रह गए। प्रबंधन का कहना है कि एलपीजी सिलेंडरों की सप्लाई रुकने से खाना बनाना संभव नहीं हो पा रहा।
गैस संकट की मार: होटल से लेकर मंदिर तक
देश के कई हिस्सों में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित होने की खबरें सामने आ रही हैं। दिल्ली, यूपी, महाराष्ट्र और राजस्थान में कई रेस्टोरेंट्स और ढाबों को भी इसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। जब होटल और रेस्टोरेंट्स के चूल्हे ठंडे पड़ने लगें, तो मंदिर की रसोई भी इससे अछूती नहीं रह सकती।
लेकिन अयोध्या में यह घटना सिर्फ एक सप्लाई समस्या नहीं रही। यह जल्द ही सियासी मुद्दा बन गई।
संसद तक पहुंचा मुद्दा
समाजवादी पार्टी के सांसद Awadhesh Prasad ने इस मुद्दे को संसद में उठाया। उन्होंने कहा कि आज़ादी के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि राम के नाम पर चलने वाली रसोई बंद करनी पड़ी है।
उनका आरोप है कि जिस राम के नाम पर राजनीति होती है, उसी राम की नगरी में गरीबों को भोजन देने वाली व्यवस्था ठप हो गई।

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो 15 मार्च से अयोध्या में आंदोलन शुरू किया जाएगा।
अखिलेश यादव का हमला
इस विवाद में सपा प्रमुख Akhilesh Yadav भी कूद पड़े। उन्होंने कहा कि अगर सरकार दावा करती है कि देश में गैस की कोई कमी नहीं है, तो जमीन पर लोगों को परेशानी क्यों हो रही है।
उनका सवाल साफ था अगर संकट नहीं है, तो चूल्हे क्यों बुझ रहे हैं?
आस्था और राजनीति का टकराव
अयोध्या केवल एक शहर नहीं है। यह भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। ऐसे में यहां किसी सेवा गतिविधि का बंद होना सीधे भावनात्मक मुद्दा बन जाता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मामला आने वाले दिनों में और राजनीतिक रंग ले सकता है।
क्योंकि जहां आस्था और राजनीति एक साथ मौजूद हों, वहां बहस जल्दी खत्म नहीं होती।
सवाल सिर्फ रसोई का नहीं
राम रसोई का बंद होना सिर्फ एक रसोई की कहानी नहीं है। यह उस व्यवस्था की कहानी भी है जहां एक छोटी-सी सप्लाई समस्या अचानक राष्ट्रीय बहस बन जाती है। अब लोगों की निगाहें इस पर टिकी हैं कि रसोई कब दोबारा खुलेगी। क्योंकि अयोध्या में कई लोग आज भी उसी चूल्हे के जलने का इंतजार कर रहे हैं।
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