
अरब सागर की लहरें उस दिन कुछ ज्यादा बेचैन थीं। खाड़ी में युद्ध का साया था, ड्रोन और मिसाइलों की खबरें हवा में तैर रही थीं, और दुनिया की ऊर्जा नसें जिस रास्ते से गुजरती हैं, वह समुद्री गलियारा तनाव से भरा हुआ था।
इसी माहौल में एक विशाल क्रूड ऑयल टैंकर अचानक ट्रैकिंग सिस्टम से गायब हो गया। न कोई लोकेशन। न कोई डिजिटल निशान। और फिर… कुछ दिनों बाद वही जहाज शांतिपूर्वक मुंबई के तट पर दिखाई दिया।
यह कहानी है Shenlong Suezmax oil tanker की, जिसने दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्तों में से एक Strait of Hormuz को पार करके भारत तक कच्चा तेल पहुंचाया।
‘डार्क मोड’ में समुद्री सफर
टैंकर ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, जहाज का आखिरी सिग्नल 9 मार्च को होर्मुज के पास रिकॉर्ड हुआ था। इसके बाद जहाज ने अपना ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) बंद कर दिया। समुद्री दुनिया में इसे ‘डार्क मोड’ कहा जाता है। यानी जहाज डिजिटल नक्शे से गायब हो जाता है। न तो सैटेलाइट उसे ट्रैक कर पाते हैं और न ही अन्य जहाजों को उसकी लोकेशन का पता चलता है।
यह कदम आमतौर पर तभी उठाया जाता है जब जहाज हाई-रिस्क जोन से गुजर रहा हो।
1.35 लाख टन क्रूड के साथ मुंबई पहुंचा
बुधवार को यह विशाल जहाज आखिरकार Mumbai Port पहुंच गया। जहाज पर कुल 135,335 मीट्रिक टन क्रूड ऑयल था, जो सऊदी अरब के Ras Tanura Port से लादा गया था। ऊर्जा बाजार के लिए यह खबर किसी राहत की सांस से कम नहीं थी।
क्योंकि जब समुद्री रास्ते युद्ध की खबरों से भरे हों, तब हर सुरक्षित पहुंचा जहाज तेल की दुनिया में छोटी जीत जैसा लगता है।
खाड़ी में बढ़ता खतरा
मध्य पूर्व में जारी सैन्य तनाव ने समुद्री व्यापार को अस्थिर कर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक कम से कम 16 जहाजों पर हमले की खबरें सामने आ चुकी हैं। इसी कारण कई बड़े टैंकर ट्रैकिंग सिस्टम से ऑफलाइन हो रहे हैं।

डेटा के मुताबिक 2 VLCC टैंकर, 3 सुएजमैक्स टैंकर, 1 पनामाक्स जहाज कम से कम 48 घंटे से ट्रैकिंग से गायब रहे हैं। इन जहाजों की मंजिलें भी वही हैं जहां दुनिया की ऊर्जा की भूख सबसे ज्यादा है भारत, चीन और जापान।
AIS सिस्टम क्या करता है?
समुद्री नेविगेशन में AIS (Automatic Identification System) जहाजों का डिजिटल पहचान पत्र होता है। यह सिस्टम जहाज की लोकेशन, स्पीड, दिशा जैसी जानकारी आसपास के जहाजों और तटीय अधिकारियों को भेजता है।
लेकिन जब यह बंद कर दिया जाए, तो जहाज समुद्र में लगभग अदृश्य हो जाता है। यानी समुद्री मानचित्र पर वह एक ऐसा साया बन जाता है जिसे ढूंढना आसान नहीं।
ऊर्जा युद्ध और भारत की चिंता
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग माना जाता है। हर दिन यहां से करीब 20 मिलियन बैरल से ज्यादा तेल गुजरता है। यह वैश्विक तेल खपत का लगभग पांचवां हिस्सा है।
यही वजह है कि यहां किसी भी सैन्य तनाव की खबर आते ही तेल बाजार में घबराहट फैल जाती है। फिलहाल भारत सरकार के अनुसार, फारस की खाड़ी में 28 भारतीय जहाज ऑपरेट कर रहे हैं।
समुद्र का यह खेल अलग है
राजनीति में भाषण होते हैं। बाजार में कीमतें उछलती हैं। लेकिन समुद्र में खेल कुछ और ही होता है। यहां कप्तान का एक फैसला हजारों टन तेल और अरबों डॉलर की सप्लाई को सुरक्षित या संकट में डाल सकता है। और इस बार, एक जहाज ने बस इतना किया कुछ देर के लिए खुद को दुनिया से छिपा लिया… और फिर चुपचाप मुंबई पहुंच गया। कभी-कभी समुद्र भी रणनीति की भाषा बोलता है।
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