
मिडिल ईस्ट की धरती पहले ही बारूद से भरी हुई है, लेकिन अब आरोप लग रहे हैं कि इस जंग में ऐसे हथियार भी इस्तेमाल हो रहे हैं जिनका नाम सुनकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान और लेबनान में हुए हमले के बाद White Phosphorus के इस्तेमाल का आरोप सामने आया है। मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि यह सिर्फ एक हथियार नहीं, बल्कि ऐसा केमिकल है जो इंसानी शरीर को जिंदा आग में बदल सकता है।
जंग का नया विवाद
मिडिल ईस्ट में जारी टकराव में अब एक नया आरोप जुड़ गया है। रिपोर्ट्स में कहा गया कि Human Rights Watch के हवाले से कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि Israel ने ईरान और दक्षिणी Lebanon ऐसे गोले दागे जिनमें White Phosphorus मौजूद था।
यह आरोप इसलिए बड़ा है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत घनी आबादी वाले इलाकों में इस केमिकल का इस्तेमाल बेहद विवादित और खतरनाक माना जाता है।
White Phosphorus आखिर है क्या
White Phosphorus कोई साधारण हथियार नहीं। यह मोम जैसे पीले या सफेद रंग का केमिकल होता है जिसकी गंध लहसुन जैसी होती है। हवा में ऑक्सीजन मिलते ही यह अपने आप जलने लगता है और तापमान लगभग 815°C तक पहुंच सकता है।
युद्ध में इसे अक्सर धुआं फैलाने या रोशनी पैदा करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन जब यह इंसानी शरीर पर गिरता है तो हालात बेहद खतरनाक हो सकते हैं।
शरीर पर गिरा तो क्या होता है
अगर White Phosphorus त्वचा के संपर्क में आ जाए तो यह मांस को गहराई तक जला सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि यह त्वचा से भीतर तक जलता रहता है और कई बार हड्डियों तक पहुंचकर गंभीर घाव बना देता है।

इसके जलने से निकलने वाला धुआं फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है और सांस लेने में भारी दिक्कत पैदा कर सकता है।
अंतरराष्ट्रीय कानून क्या कहता है
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि आबादी वाले इलाकों में इस तरह के हथियार का इस्तेमाल गंभीर चिंता का विषय है। Amnesty International और अन्य संस्थाएं पहले भी ऐसे आरोपों की जांच की मांग करती रही हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक युद्ध में स्मोक स्क्रीन बनाने के लिए इसका सीमित सैन्य उपयोग संभव है, लेकिन सिविलियन इलाकों में इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के खिलाफ माना जाता है।
यह बनता कैसे है
White Phosphorus आमतौर पर फॉस्फेट चट्टानों से निकाला जाता है। इसे सैन्य गोले, रॉकेट और बमों में भरा जाता है। जलने पर इससे घना सफेद धुआं निकलता है जो युद्धक्षेत्र को ढक देता है और सैनिकों को अस्थायी कवर देता है।
इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि कैसे घना सफेद धुआं फैला हुआ है
जंग से बड़ा सवाल
मिडिल ईस्ट का यह संघर्ष पहले ही हजारों जिंदगियों को प्रभावित कर चुका है। अब सवाल सिर्फ सैन्य रणनीति का नहीं, बल्कि मानवीय कानून और युद्ध की सीमाओं का भी है। अगर ऐसे हथियारों के इस्तेमाल के आरोप साबित होते हैं तो यह विवाद अंतरराष्ट्रीय मंचों तक जा सकता है।
इसके बाद ये साबित हो जाता है कि अमेरिका और ईरान युद्ध में इतने अंधे हो चुके हैं कि अब नरसंहार पर उतर आए हैं, दुनिया अभी भी चुप रही तो आज ईरान है कल कोई और भी होगा।
