
मिडिल ईस्ट में जंग कोई नई कहानी नहीं, लेकिन इस बार कहानी का स्केल डराने वाला है. सिर्फ 10 दिनों में बारूद की इस शतरंज ने करीब 15 देशों को अपनी चपेट में ले लिया. एक तरफ Israel और United States की संयुक्त सैन्य कार्रवाई है, दूसरी तरफ Iran अपनी मिसाइलों और ड्रोन के साथ जवाब दे रहा है. नतीजा…मिडिल ईस्ट का आसमान अब रडार नहीं, धुएं और धमाकों से भरा हुआ है.
10 दिन में कितना नुकसान
28 फरवरी से शुरू हुई इस लड़ाई ने महज कुछ दिनों में भयावह तस्वीर बना दी. रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 6668 सिविल एरिया निशाने पर आए. लगभग 5535 घर तबाह हुए और हजारों लोग पलायन को मजबूर हो गए. इजरायल में भी जवाबी हमलों के दौरान करीब 1765 लोग घायल बताए जा रहे हैं. कुल मिलाकर इस जंग में अब तक 1700 से ज्यादा लोगों की मौत की खबर है.
स्कूल और अस्पताल भी नहीं बचे
युद्ध का सबसे कड़वा सच यही है कि बमों को फर्क नहीं पड़ता कि सामने सैनिक है या स्कूल. इस संघर्ष में 65 स्कूल और 14 मेडिकल सेंटर भी तबाह होने की खबरें सामने आई हैं. मतलब यह कि जंग सिर्फ मोर्चे पर नहीं लड़ी जा रही यह शहरों के बीच भी फैल चुकी है.
तेल और मिसाइल का खतरनाक समीकरण
इस जंग में रणनीति सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रही. United States और Israel ने ईरान के कई ऑयल डिपो और रिफाइनरियों को भी निशाना बनाया. उधर जवाब में ईरान ने मिसाइलों और ड्रोन के जरिए एयर डिफेंस नेटवर्क और सैन्य ठिकानों को टारगेट किया.
इस पूरे खेल में THAAD Missile Defense System जैसे हाईटेक सिस्टम भी नुकसान की खबरों में शामिल हैं.

सत्ता बदलते ही मिसाइलों की बारिश
इसी बीच तेहरान में सत्ता का नया अध्याय भी खुल गया. Mojtaba Khamenei को नया सर्वोच्च नेता घोषित किए जाने के बाद ईरान की सेना
Islamic Revolutionary Guard Corps ने मिसाइलों की नई लहर दागने का दावा किया. इसे ऑपरेशन “True Promise 4” का हिस्सा बताया गया.
कूटनीति की आखिरी कोशिश
मिडिल ईस्ट की इस आग को बुझाने के लिए कुछ देश अभी भी बातचीत का रास्ता तलाश रहे हैं. Mohammed bin Abdulrahman Al Thani ने तनाव कम करने और संवाद शुरू करने की अपील की है. लेकिन मैदान में मिसाइलें चल रही हों तो बातचीत की आवाज अक्सर धीमी पड़ जाती है.
असली खतरा अभी बाकी है
अगर अमेरिका ईरान के परमाणु ठिकानों पर कब्जा करने की कोशिश करता है तो यह संघर्ष और बड़ा रूप ले सकता है. यानी अभी जो दिख रहा है वह शायद इस युद्ध का पहला अध्याय ही है. और अगर मिडिल ईस्ट की इस शतरंज में अगली चाल गलत चली तो इसका असर सिर्फ एक इलाके तक सीमित नहीं रहेगा पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर पड़ेगा.
8 दिन की तबाही के बाद ईरान पड़ोसियों पर नरम… लेकिन जंग अभी ठंडी नहीं!
