अफगान एयरबेस से ईरान पर वार? मुनीर के खुलासे ने बढ़ाई गर्मी

हुसैन अफसर
हुसैन अफसर

दक्षिण वजीरिस्तान के वाना इलाके में जब पाकिस्तानी थल सेनाध्यक्ष जनरल आसिम मुनीर पहुंचे, तो यह सिर्फ एक रूटीन मिलिट्री विजिट नहीं था। यह एक पॉलिटिकल-स्ट्रैटेजिक मैसेज था सीधा काबुल और शायद तेहरान तक।

मुनीर ने सीमा की स्थिति का जायजा लेने के बाद दावा किया कि हालिया ईरान हमलों में अफगानिस्तान की जमीन और वहां के एयरबेस का इस्तेमाल हुआ। यह बयान क्षेत्रीय कूटनीति में पेट्रोल छिड़कने जैसा है। पाक सेना की मीडिया विंग ने साफ कहा, “पड़ोसी देशों के खिलाफ अफगान धरती का इस्तेमाल पूरी तरह अस्वीकार्य है।”

मैसेज क्लियर है पाकिस्तान अब ‘डिनायल मोड’ में नहीं, ‘एक्शन मोड’ में है।

‘ऑपरेशन गजब लिल हक’: जवाब या दबाव?

2600 किलोमीटर लंबी पाकिस्तान-अफगान सीमा पर लगातार हमलों के बाद इस्लामाबाद ने ‘ऑपरेशन गजब लिल हक’ लॉन्च किया।  आधिकारिक तौर पर इसे “रिएक्टिव डिफेंस” कहा जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कहीं ज्यादा जटिल है।

पाकिस्तान का आरोप है कि TTP जैसे आतंकी संगठनों को अफगानिस्तान में पनाह और ट्रेनिंग मिल रही है। काबुल इन आरोपों से इनकार करता रहा है, लेकिन सीमा पर गोलीबारी और ड्रोन सर्विलांस ने तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है।

वाना में सैनिकों को संबोधित करते हुए मुनीर ने कहा,“अब सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा।” यह बयान सिर्फ सैनिकों का मनोबल नहीं, बल्कि कूटनीतिक दबाव की रणनीति भी है।

तालिबान के लिए ‘लास्ट नोटिस’?

मुनीर का लहजा इस बार असाधारण रूप से सख्त था। उन्होंने साफ कहा कि अगर तालिबान आतंकवाद पर लगाम नहीं लगाता, तो परिणाम गंभीर होंगे।

यह बयान दो स्तरों पर असर डालता है पाकिस्तान-अफगान रिश्तों में अविश्वास और गहरा। ईरान-अफगान समीकरण पर भी सवाल।

अब सवाल उठ रहा है क्या सच में अफगान एयरबेस किसी तीसरी ताकत को इस्तेमाल करने दिया गया? या यह एक जियोपॉलिटिकल नैरेटिव बिल्ड-अप है?

सच जो भी हो, बयान ने मिडिल ईस्ट से साउथ एशिया तक हलचल बढ़ा दी है।

सरहद पर हाई-टेक चौकसी, अंदरूनी बेचैनी

दौरे के दौरान मुनीर को फेंसिंग, इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और इंटेलिजेंस-बेस्ड ऑपरेशंस की ब्रीफिंग दी गई। उन्होंने अग्रिम चौकियों पर जाकर सैनिकों से सीधे बातचीत की। अब पाकिस्तान पश्चिमी सीमा पर टेक्नोलॉजी-ड्रिवन सर्विलांस, ड्रोन मॉनिटरिंग और क्विक रिस्पॉन्स यूनिट्स की तैनाती बढ़ा रहा है। यह सिर्फ सीमा सुरक्षा नहीं यह एक लंबी रणनीतिक तैयारी का संकेत है।

बदलता समीकरण: क्षेत्र में नई रेखाएं

पाकिस्तान का यह आक्रामक रुख बताता है कि आने वाले महीनों में अफगान सीमा शांत नहीं रहने वाली। एक तरफ तालिबान सरकार अंतरराष्ट्रीय मान्यता के लिए जूझ रही है, दूसरी तरफ पाकिस्तान उस पर ‘डबल गेम’ का आरोप लगा रहा है। अगर यह आरोप-प्रत्यारोप सैन्य टकराव में बदला, तो इसका असर सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा—ईरान, चीन और अमेरिका तक इसकी गूंज सुनाई दे सकती है।

वाना से उठी यह चेतावनी शायद आने वाले बड़े भू-राजनीतिक बदलाव का ट्रेलर है।

“War नहीं, Law की बात! खामेनेई मामले पर खरगे का कूटनीतिक वार”

Related posts

Leave a Comment