
उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक पुरानी कहावत नए सिरे से गूंज रही है — “माया मिली न राम।” राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग कर पार्टी लाइन से अलग जाने वाले समाजवादी पार्टी के विधायक अब राजनीतिक चौराहे पर खड़े दिखाई दे रहे हैं। सत्ता की तरफ झुकाव से जिस “मलाई” की उम्मीद थी, वह अब तक हाथ नहीं आई।
जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, बगावती तेवरों की धार कुंद पड़ती दिख रही है।
कहानी की शुरुआत: राज्यसभा चुनाव 2024
फरवरी 2024 के राज्यसभा चुनाव में सपा के कुछ विधायकों ने पार्टी व्हिप के खिलाफ जाकर भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया।इसके बाद सपा नेतृत्व ने कड़ा संदेश देते हुए मनोज पांडेय, अभय सिंह, राकेश प्रताप सिंह और पूजा पाल को निष्कासित कर दिया।
सपा प्रमुख Akhilesh Yadav ने उस समय स्पष्ट कहा था कि पार्टी अनुशासन सर्वोपरि है। राजनीतिक भाषा में यह “डिसिप्लिन ओवर डिसेंट” का संकेत था।
सत्ता की आस, लेकिन सियासी सन्नाटा
बागी विधायकों को उम्मीद थी कि सत्ता पक्ष में उन्हें मंत्री पद, बोर्ड-निगम या संगठन में मजबूत जगह मिलेगी। लेकिन महीनों बीत गए न मंत्री पद मिला, न विशेष भूमिका।
सियासत में समय बहुत जल्दी सिखा देता है कि समीकरण सिर्फ एक वोट से नहीं बदलते।
“जैसे गए थे, वैसे ही लौट आएं”
सूत्रों के मुताबिक, सपा नेतृत्व का रुख सख्त है। संदेश साफ है, वापसी का रास्ता बंद नहीं, लेकिन शर्तों के साथ।

कसौटी क्या होगी? आगामी राज्यसभा चुनाव।
25 नवंबर को उत्तर प्रदेश कोटे की 10 सीटें खाली हो रही हैं। यह वही मंच है जहां से बगावत शुरू हुई थी, और अब वहीं “प्रायश्चित” की चर्चा है।
राजनीतिक गणित बनाम अंतरात्मा
राजनीति में स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होते, स्थायी हित होते हैं। बागी विधायकों के सामने दोहरी चुनौती है- पार्टी नेतृत्व के सामने विश्वसनीयता साबित करना, मतदाताओं के बीच अपनी छवि संभालना। अगर वे सपा में लौटते हैं, तो उन्हें अनुशासन की कसौटी पर खरा उतरना होगा। अगर नहीं लौटते, तो चुनावी जमीन तलाशना आसान नहीं होगा।
“अंतरात्मा” की आवाज अक्सर चुनावी मौसम में बदल जाती है।
क्या होगा अगला मोड़?
उत्तर प्रदेश की सियासत में यह सिर्फ व्यक्तिगत वापसी का मामला नहीं, बल्कि 2027 के समीकरणों की भूमिका भी है। राज्यसभा चुनाव अब केवल संसदीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि “राजनीतिक रिहर्सल” बन चुका है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि बगावत की कहानी वापसी में बदलेगी या नया अध्याय लिखेगी।
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