लखनऊ में ‘साइलेंट स्ट्रैटेजी’: 2027 से पहले संघ-सरकार की केमिस्ट्री टेस्ट!

शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

बुधवार को लखनऊ के निरालानगर कार्यालय में Mohan Bhagwat और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के बीच करीब 40 मिनट तक अहम बैठक हुई।

सूत्रों के मुताबिक यह सिर्फ शिष्टाचार मुलाकात नहीं थी, बल्कि 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर रणनीतिक चर्चा का हिस्सा थी।

2027 की तैयारी, 2024 से सबक?

2024 लोकसभा चुनाव के अनुभवों के बाद बीजेपी अब कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रही। कहा जा रहा है कि बैठक में संगठन और सरकार के तालमेल पर विशेष फोकस रहा। मंत्रियों के कामकाज पर चर्चा हुई। अफसरशाही पर चर्चा हुई।

बैठक के बाद डिप्टी सीएम Keshav Prasad Maurya और Brajesh Pathak ने भी संघ प्रमुख से मुलाकात की। इस मुलाकात में विधायकों के आचरण, कार्यशैली पर बात हुई।

‘संगठन बड़ा या सरकार?’ संदेश क्या है?

सूत्रों के हवाले से पता चल है कि संघ की ओर से स्पष्ट संकेत दिया गया कि “संगठन हमेशा सरकार से बड़ा रहेगा।” टिकट बंटवारे और चुनावी रणनीति में संघ की भूमिका मजबूत होने के संकेत के तौर पर देख रहे हैं।

यानी 2027 की पिच पर बैटिंग लाइन-अप तय करने में अब फीडबैक सिस्टम और ज्यादा सक्रिय रहेगा।

बीजेपी की नई रणनीति?

बताया जा रहा है कि उम्मीदवार चयन से लेकर बूथ मैनेजमेंट तक, संगठन के इनपुट को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। Political observers मानते हैं कि यह कदम कैडर बेस को मजबूत रखने और जमीनी असंतोष को पहले ही भांप लेने की कोशिश हो सकता है।

राजनीति में कैमरे से ज्यादा मायने रखती है बंद कमरे की बातचीत।

सरकार- संगठन में नए चेहरे

सूत्रों के मुताबिक पंकज चौधरी के नेतृत्व वाली नई कार्यसमिति में अधिकतर नए नाम नजर आएंगे। युवाओं को मौका मिलेगा। कुछ वर्त्तमान पदाधिकारी सरकार का हिस्सा बनेंगे। कई मंत्री बाहर होंगे।

सियासी सिग्नल क्या कहते हैं?

यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है जब यूपी की राजनीति 2027 की ओर धीरे-धीरे बढ़ रही है। जहां विपक्ष गठजोड़ की संभावनाएं तलाश रहा है, वहीं सत्ता पक्ष आंतरिक तालमेल को दुरुस्त करने में जुटा है।

सवाल यही है क्या 2027 में रणनीति बदलेगी, या सिर्फ चेहरे?

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