
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक और बड़ा मोड़ देखने को मिला। पूर्व BSP नेता Naseemuddin Siddiqui ने आधिकारिक तौर पर Samajwadi Party का दामन थाम लिया।
यह जॉइनिंग पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav की मौजूदगी में हुई, जिसने इसे सिर्फ एक राजनीतिक कदम नहीं, बल्कि संदेश माना जा रहा है।
कौन-कौन हुए शामिल?
सिद्दीकी के साथ BSP के पूर्व नेता अनीस अहमद खान, अपना दल के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एस राज कुमार पाल। तीनों नेताओं की एंट्री को 2027 की सियासी रणनीति के नजरिए से देखा जा रहा है।
अखिलेश यादव का हमला: BJP और Election Commission पर आरोप
जॉइनिंग के मंच से अखिलेश यादव ने तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भाजपा और Election Commission “एक ही दिशा में काम करते दिख रहे हैं।”
उनका आरोप था कि Form-7 के जरिए समाजवादी पार्टी के समर्थकों, खासकर PDA और मुस्लिम मतदाताओं को टारगेट किया गया। अखिलेश ने यह भी सवाल उठाया कि यदि प्रशासनिक स्तर पर सख्त कार्रवाई होती, तो कथित गड़बड़ियों की गुंजाइश कम होती।
सियासत में आरोप-प्रत्यारोप नया नहीं, लेकिन जब मंच बदलता है तो बयान भी headline बन जाते हैं।
सिद्दीकी का बयान: “पुराने रिश्ते, नई जिम्मेदारी”
सपा में शामिल होने के बाद नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि उनके और अखिलेश यादव के पुराने संबंध हैं और वे मिलकर पार्टी को मजबूत करेंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले चुनावों में संगठनात्मक मजबूती प्राथमिकता होगी।
UP की राजनीति में दल-बदल कोई नई बात नहीं। लेकिन हर एंट्री एक संकेत देती है क्या यह मुस्लिम वोट बैंक को consolidate करने की रणनीति है? क्या PDA नैरेटिव को और धार दी जा रही है? या फिर 2027 की groundwork अभी से शुरू हो चुकी है? सवाल कई हैं, जवाब वक्त देगा।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में chessboard लगातार बदल रहा है। एक तरफ सपा संगठन मजबूत करने में जुटी है, दूसरी ओर BJP और विपक्ष के बीच बयानबाजी का दौर तेज हो रहा है। लोकतंत्र में narrative भी चुनाव जितना ही महत्वपूर्ण होता है और फिलहाल narrative की जंग जारी है।
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