New START खत्म: 50 साल पुराना Nuclear Brake अब History

अजीत उज्जैनकर
अजीत उज्जैनकर

5 फरवरी को अमेरिका और रूस के बीच न्यू स्टार्ट (New START) संधि आधिकारिक तौर पर खत्म हो गई। इसके साथ ही दुनिया ने वो दौर भी पीछे छोड़ दिया, जहाँ परमाणु हथियारों पर कम से कम काग़ज़ी लगाम हुआ करती थी।

2011 से लागू यह संधि दोनों देशों को सीमित करती थी अधिकतम 1550 nuclear warheads, 700 लॉन्चर्स और 800 deployed launch systems अब? कोई सीमा नहीं, कोई बाध्यता नहीं सिर्फ “हम जो चाहें, जितना चाहें”

हथियार कम करने की बात, हथियारों से ही

दुनिया शांति की बात करती रही और सुपरपावर गिनती करते रहे किसके पास कितने बटन हैं। अब बटन खुले हैं, नियम बंद।

रूस ने एक्सटेंशन दिया, अमेरिका ने साइलेंस

दिलचस्प बात ये है कि सितंबर 2025 में राष्ट्रपति पुतिन ने इस संधि को एक साल बढ़ाने का प्रस्ताव दिया था। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से कोई औपचारिक जवाब नहीं आया।

अमेरिका का तर्क साफ था “जब चीन इस संधि में नहीं है, तो यह outdated है।”

रूस ने भी फिर साफ कह दिया हम अब इन सीमाओं को नहीं मानते।

“Danger Zone Ahead”

New START खत्म होने का मतलब है Nuclear arms race की वापसी। Trust deficit और गहराएगा। Verification mechanisms खत्म। यानि अब कोई ये नहीं देखेगा कि कौन कितना बना रहा है, कहाँ तैनात कर रहा है।

Cold War से आज तक: परमाणु नियंत्रण की कहानी

  • 1970s: SALT agreements (बात हुई, भरोसा नहीं बना)
  • 1991: START-I (Bush–Gorbachev)
  • 1993: START-II (कागज़ पर रह गया)
  • 2002: SORT Treaty (Putin–Bush)
  • 2010: New START (Obama–Medvedev)
  • 2011: लागू
  • 2021: Biden ने 5 साल बढ़ाया
  • 2026: आज… अंत

इतिहास लंबा था, patience छोटा निकल गया।

आज किसके पास कितने परमाणु हथियार?

जनवरी 2025 तक के आंकड़े बताते हैं—

  1.  रूस: 4309 warheads
  2.  अमेरिका: 3700 warheads
  3.  चीन: 600
  4.  फ्रांस: 290
  5.  ब्रिटेन: 225

मतलब साफ है दुनिया के 90% से ज्यादा परमाणु हथियार सिर्फ दो देशों के पास हैं।

अब कोई संधि नहीं, कोई निरीक्षण नहीं, कोई ceiling नहीं। अगर नई nuclear deal नहीं बनी, तो यह दौर Cold War 2.0 नहीं, Hot Silence Era कहलाएगा जहाँ सब मुस्कुराते हैं, लेकिन उंगलियाँ ट्रिगर पर रहती हैं।

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